गौसेवक ने वीडियो जारी कर किया ऐलान, कहा-गौवंशीय पशुओं के लिए श्मशान, नमक और कफन दिया जाये
मुजफ्फरनगर। शहर मुजफ्फरनगर में गौसेवक निशु ने गौवंशीय पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए समुचित व्यवस्था न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की “डबल इंजन” सरकार पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि गौ माता के अंतिम संस्कार के लिए अलग श्मशान घाट, नमक और कफन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गौवंश के अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर उठी मांग ने न केवल प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को भी केंद्र में ला दिया है।
गौसेवक निशु का कहना है कि जिले में भाजपा की बहुस्तरीय सरकार होने के बावजूद गौवंश के अंतिम संस्कार के लिए कोई स्थायी और व्यवस्थित स्थल उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में गौसेवक स्वयं चंदा जुटाकर और निजी खर्च से अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं, जो लंबे समय से जारी एक अस्थायी व्यवस्था है। इस मुद्दे को लेकर निशु हाल ही में टाउनहाल में गौसेवकों के साथ धरना भी दिया गया था। इसके बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज निशु ने अब आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र ही उचित स्थल का चयन कर श्मशान घाट का निर्माण और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई, तो वह बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
निशु ने यह भी घोषणा की है कि मांग पूरी न होने की स्थिति में जिले के जनप्रतिनिधियों के आवासों के बाहर क्रमिक अनशन और धरना शुरू किया जाएगा। निशु ने कहा कि मुजफ्फरनगर में भाजपा की ट्रिपल इंजन की सरकार है, जिला पंचायत और नगर पालिका में भाजपा मजबूत है और जिले में दो मंत्री भी है, इसके बावजूद भी सनातनी संस्कृति के अनुसार गौवंशीय पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए कोई भी उचित व्यवस्था नहीं की गई है। यहां वहां जंगल में ही धार्मिक क्रिया के बिना ही गौवंशीय पशुओं को गडढे में दबाया जा रहा है, इससे सभी गौसेवकों की आस्था को ठेस पहुंच रही है। गौसेवक निशु के इस ऐलान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गौरतलब है कि गौवंश की देखभाल और संरक्षण को लेकर समय-समय पर विभिन्न संगठनों द्वारा आवाज उठाई जाती रही है, लेकिन अंतिम संस्कार की व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह का आंदोलन पहली बार व्यापक रूप से सामने आया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।






