खतौली पुलिस पर सवालः लिपिक की मौत के बाद एफआईआर

ड्यूटी से घर जाते समय ई-रिक्शा हटाने को लेकर हुआ था दिव्यांग चालक संग विवाद, खुद चंकी ने थाने जाकर दी थी तहरीर, 24 घंटे तहरीर दबाये बैठी रही खतौली पुलिस

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के खतौली में एक मामूली सड़क विवाद ने दर्दनाक मोड़ ले लिया। नगर पालिका के लिपिक पर बैसाखी से किया गया हमला उनकी मौत का कारण बन गया, जबकि पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। खतौली नगर पालिका में तैनात लिपिक चंकी भारद्वाज की मौत के बाद पुलिस हरकत में आई और अज्ञात हमलावर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। तहरीर दिए जाने के करीब 24 घंटे बाद मुकदमा दर्ज होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों में भी रोष व्याप्त है। पुलिस कह रही है कि हमलावर को तलाश किया जा रहा है।

खतौली नगर में घटी यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना बुधवार शाम करीब पांच बजे की है, जब नगरपालिका खतौली में लिपिक के पद पर कार्यरत 32 साल के चंकी भारद्वाज ड्यूटी समाप्त कर बाइक से घर लौट रहे थे। नगर पालिका मुख्य द्वार के पास उनकी बाइक की साइड एक ई-रिक्शा से लग गई। इस बात को लेकर कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झगड़े में बदल गई। आरोप है कि दिव्यांग ई-रिक्शा चालक ने अपनी लोहे की बैसाखी से चंकी के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से चंकी मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर पालिका कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। घायल अवस्था में चंकी स्वयं कोतवाली पहुंचे और अज्ञात हमलावर के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। इसके बाद परिजन उनको निजी चिकित्सक के पास ले गये। वहां उपचार के बाद चंकी को परिजन घर लेकर आ गये थे, लेकिन रात में हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मेरठ के एक निजी नर्सिंग होम ले गए, जहां गुरुवार सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

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मौत के बाद परिजनों और पालिका कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। उनका आरोप है कि समय पर कार्रवाई होती तो शायद जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी कोतवाली पहुंचे और सख्त कार्रवाई की मांग की। चंकी भारद्वाज को नगर पालिका में नौकरी उनके पिता प्रदीप शर्मा की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित के रूप में मिली थी। वह परिवार के इकलौते पुत्र थे। चार साल पहले उनका विवाह हुआ था, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं है।
इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं, खुद नगरपालिका के ईओ अन्य कर्मचारियों के साथ चंकी को लेकर थाने पहुंचे थे, वहां चंकी ने ही खुद अज्ञात ई रिक्शा चालक के खिलाफ तहरीर दी। यानि की बुधवार की शाम ही पुलिस को घटना की शिकायत मिल चुकी थी। पुलिस के ही अनुसार शिकायत 22 अपै्रल को पहर एक में प्राप्त हो चुकी थी, लेकिन मुकदमा 23 अपै्रल को दोपहर 12ः22 बजे दर्ज किया गया। जबकि 23 अपै्रल की सुबह चंकी भारद्वाज की मौत मेरठ के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान हो चुकी थी।

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चंकी भारद्वाज ने जो तहरीर थाने में दी, उसमें हमलावर पक्ष के कई लोगों के होने का संकेत है। तहरीर में चंकी ने बताया कि वो नगरपालिका में ड्यूटी समाप्त करते हुए बाइक से घर जाने के निकला, नगर पालिका गेट पर पहुंचा तो ई रिक्शा सड़क में खड़ा था, हटाने के लिए कहा तो उन्होंने मेरे साथ गाली गलौच करते हुए मारपीट की और धमकी देकर भाग गये। इस मामले में खतौली पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलते ही मामले की जांच शुरू कर दी गई थी और आरोपी की तलाश में टीम को लगा दिया था। एफआईआर देरी से दर्ज करने पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।

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