भ्रष्टाचार का कबूलनामाः पुलिस भर्ती के नाम पर तीन करोड़ की ठगी

कसेरवा गांव का मामला, चार मिनट से अधिक की बातचीत से हड़कम्प, पुलिस ने ऑडिया को बताया दो साल पुराना मामला, जांच हुई शुरू

मुजफ्फरनगर। शनिवार को प्रदेश के साथ ही जनपद में उप निरीक्षक के पद पर पुलिस भर्ती की परीक्षा हुई, इसी बीच पुलिस में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ताजा मामला मुजफ्फरनगर जनपद से सामने आया है, जहां पुलिस भर्ती में चयन कराने का झांसा देकर करोड़ों रुपये वसूलने का आरोप लगा है। एक वायरल ऑडियो में कथित तौर पर आरोपी भर्ती के नाम पर करोड़ों रुपये लेने की बात स्वीकार करता सुनाई दे रहा है।

मुजफ्फरनगर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के कसेरवा गांव निवासी ताहिर उर्फ काला प्रधान का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब चार मिनट 19 सेकेंड की इस रिकॉर्डिंग में वह कथित तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से भारी रकम लेने की बात स्वीकार करता सुनाई देता है। बताया जा रहा है कि आरोपी और उसके साथियों ने भर्ती प्रक्रिया में चयन कराने का भरोसा दिलाकर युवाओं से लाखों रुपये की रकम ली थी। वायरल ऑडियो में बातचीत के दौरान आरोपी यह कहते हुए सुना जा रहा है कि अलग-अलग करीब 50 अभ्यर्थियों से पैसे लेकर लगभग तीन करोड़ रुपये तक की राशि इकट्ठा की गई और इसे लखनऊ तक पहुंचाया गया।

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रिकॉर्डिंग में एक युवक खुद को पीड़ित बताते हुए पैसे वापस मांगते हुए नाराजगी जताता है। दूसरी ओर से आरोपी और उसके सहयोगी रकम लौटाने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाते हुए सुनाई देते हैं। बताया जा रहा है कि यह बातचीत आरोपी के कुछ साथियों और पीड़ित युवकों के बीच हुई थी, जिसकी रिकॉर्डिंग अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सूत्रों के अनुसार कई अभ्यर्थियों ने भरोसा कर लाखों रुपये तक की रकम दे दी थी। लेकिन जब भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उनका चयन नहीं हुआ तो उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। इसी दौरान हुई बातचीत का यह ऑडियो सामने आया है।

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मामले में पुलिस का कहना है कि वायरल हो रहा ऑडियो लगभग दो साल पुराना बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि वास्तव में कितनी रकम ली गई थी तथा इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेरोजगारी के दौर में सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद रखने वाले युवाओं को ऐसे गिरोह आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। भर्ती के नाम पर पैसे लेकर उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जाता है। वायरल ऑडियो सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि ऐसे गिरोहों पर कब तक प्रभावी कार्रवाई होगी। अब लोगों की नजर पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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