लापरवाही के आरोपों के बीच किसानों में रोष, प्रशासन ने राहत व मरम्मत कार्य तेज करने के दिए निर्देश
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र में नहर टूटने की घटना ने एक बार फिर सिंचाई व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। तड़के हुए इस हादसे ने सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल है। चरथावल-घिस्सुखेड़ा मार्ग स्थित नहर दहचंद झाल के समीप तड़के लगभग 3 से 4 बजे के बीच अचानक टूट गई। नहर का पानी तेज़ी से आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे देखते ही देखते सैकड़ों बीघा भूमि जलमग्न हो गई। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से गेहूं की फसल तैयार खड़ी थी, जो कटाई के कगार पर थी, लेकिन पानी भरने से भारी नुकसान हो गया।
स्थानीय किसानों के अनुसार, लगभग 200 से 300 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जबकि कई अन्य खेतों में भी नुकसान की आशंका बनी हुई है। सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो चारों ओर पानी ही पानी देखकर स्तब्ध रह गए। कई किसानों ने बताया कि उनकी सालभर की मेहनत और लागत एक ही रात में खत्म हो गई। घटना के बाद प्रभावित किसानों में भारी आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि नहर की स्थिति लंबे समय से खराब थी और कई बार इसकी मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को अवगत कराया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों ने इसे विभागीय लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नहर टूटने के बाद काफी समय तक कोई सक्षम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिससे पानी लगातार खेतों में भरता रहा और नुकसान बढ़ता गया। कई स्थानों पर अभी भी पानी का बहाव जारी है, जिससे फसल को और क्षति पहुंचने की आशंका है। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक पंकज मलिक ने अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से राजस्व और सिंचाई विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया है। नहर की मरम्मत के लिए श्रमिकों को लगाया गया है और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और किसानों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। वहीं, किसानों ने मांग की है कि नहर की केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सिंचाई ढांचे की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है, जिस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसे हादसे आगे भी किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकते हैं।






