CYBER FRAUD–सोशल साइट पर दोस्ती, निवेश का झांसा और फिर तीन करोड़ की ठगी

तमिलनाडु, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी इस खाते के खिलाफ साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज, जिनमें 2 करोड़ 01 लाख 53 हजार 200 रुपये की धोखाधड़ी शामिल है। 29 बैंक खातों का उपयोग

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है, जिसमें सोशल मीडिया पर दोस्ती कर निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर एक युवक से तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक फरार साथी की तलाश जारी है। पुलिस टीम अब तक करीब 50 लाख रुपये की रकम फ्रीज कर पीड़ित को वापस कराने की कार्रवाई को शुरू कर चुकी है।
रिजर्व पुलिस लाइन में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर क्राइम टीम ने विस्तृत जांच और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर एक संगठित गिरोह से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किया गया है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीन करोड़ नौ लाख बाईस हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर हुई दोस्ती के बाद पीड़ित को निवेश पर भारी लाभ दिलाने का झांसा दिया गया और धीरे-धीरे उससे करोड़ों रुपये ऐंठ लिए गए।
पीड़ित की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

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नई मंडी निवासी सचिन कुमार ने 9 अक्टूबर 2025 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि फेसबुक पर किसी अज्ञात व्यक्ति से उनकी मित्रता हुई थी। बातचीत के दौरान उनसे निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर कुल 3 करोड़ 09 लाख 22 हजार रुपये ठगी गए। शिकायत मिलने के बाद मुकदमा संख्या 32/2025 दर्ज किया गया, जिसमें दो संदिग्धों के नाम सामने आए। पुलिस ने 7 दिसंबर को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपितों में मौहम्मद माज पुत्र मौहम्मद शब्बर हसन निवासी सर्वाेदय नगर गाजीपुर लखनऊ पूर्वी और अम्बरीश मिश्रा पुत्र त्रिलोकीनाथ मिश्रा निवासी रामदुनाई जिला जौनपुर शामिल हैं। जबकि उनका साथी उपेन्द्र चंदेल पुत्र महेन्द्र सिंह चंदेल निवासी मिर्जापुर खडंजा कल्याणपुर कानपुर नगर फरार बताया गया है, जिसकी तलाश जारी है।
एसएसपी संजय वर्मा के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों ने कबूल किया कि अंबरीश पहले दिल्ली में वाहन पार्किंग का काम करता था, लेकिन कमाई कम होने के चलते वह उपेंद्र चंदेल के संपर्क में आया। उपेंद्र ने उससे फर्जी खातों के माध्यम से लेनदेन करने और इसके बदले कमीशन देने की बात कही। अंबरीश ने उपेंद्र को अपने दो बैंक खाते उपलब्ध कराए, जिनमें लगभग 90 लाख रुपये साइबर ठगी से जमा हुए। बाद में खातों पर होल्ड लगने पर वह दिल्ली छोड़कर लखनऊ, कानपुर और जौनपुर में फर्जी पहचान के साथ साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता रहा।
पुलिस के अनुसार वारदात में प्रयुक्त बैंक खातों के धारककृबृजेश कुमार तिवारी, प्रमेन्द्र उपाध्याय (दिशा मानव कल्याण एवं उत्थान समिति) भी आरोपितों के संपर्क में आए थे। इन खातों के माध्यम से करोड़ों की लेनदेन हुई और खाते से जुड़े दस्तावेज, इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस और सिम कार्ड तक आरोपितों को सौंप दिए गए थे। जांच में पता चला कि दिशा मानव कल्याण एवं उत्थान समिति के बैंक खाते में कुल 1 करोड़ 27 लाख रुपये की संदिग्ध लेनदेन हुई है।

इसके अलावा तमिलनाडु, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी इस खाते के खिलाफ साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 2 करोड़ 01 लाख 53 हजार 200 रुपये की धोखाधड़ी शामिल है। ये शातिर ठगों का गिरोह अब तक 29 अलग-अलग बैंक खातों का उपयोग कर चुका है। अन्य खातों की जांच जारी है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक लगभग 50 लाख रुपये फ्रीज कर पीड़ित के खाते में वापस कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि आगे की जांच में और भी रकम बरामद हो सकती है। इन शातिरों की गिरफ्तारी में साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, निरीक्षण प्रदीप कुमार, उप निरीक्षक गौरव चौहान, धर्मराज यादव, हेड कांस्टेबल बाल किशन व आकाश चौधरी और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल रहे। सोशल मीडिया पर दोस्ती और आकर्षक निवेश प्रस्तावों के झांसे में हुए इस बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश साइबर क्राइम पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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