22 से 25 मार्च तक चार दिवसीय कार्यक्रम का हो रहा आयोजन, किसानों को सिखाई जाएगी शून्य बजट प्राकृतिक खेती की तकनीक
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के सिसौली स्थित किसान भवन में भारतीय किसान यूनियन के द्वारा रसायनिक खेती से प्राकृति की ओर अभियान के दृष्टिगत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों के लिए एक बड़े प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के प्रख्यात कृषिविद् और पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुभाष पालेकर किसानों को रसायन मुक्त खेती के गुर सिखाएंगे।
भारतीय किसान यूनियन द्वारा किसानों को रसायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए सिसौली के किसान भवन में 22 से 25 मार्च 2026 तक चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में देश में प्राकृतिक खेती के जनक माने जाने वाले डॉ. सुभाष पालेकर किसानों को आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से प्राकृतिक खेती के नए तरीके सिखाएंगे।
इस सम्बंध में जानकारी देते हुए भाकियू के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने बताया कि वर्तमान समय में खेती लगातार कई गंभीर संकटों से जूझ रही है। उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि किसानों की आय पर दबाव बना हुआ है। ऐसे हालात में प्राकृतिक खेती एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आई है, जिसे अपनाकर किसान अपनी लागत घटा सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को इस दिशा में जागरूक और प्रशिक्षित करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से यह शिविर आयोजित किया जा रहा है, जहां रसायन मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने जैसे प्राकृतिक विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
राकेश टिकैत के अनुसार यह शिविर केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा अभियान है। इसमें प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं को व्यवहारिक रूप से समझाया जाएगा, ताकि किसान सीधे अपने खेतों में इन तकनीकों को लागू कर सकें। इस शिविर के मुख्य अतिथि पदम श्री डॉ. सुभाष पालेकर के सम्बंध में उन्होंने बताया कि उनका जन्म 1 जुलाई 1949 में महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के बेलोरा गांव में हुआ था और उनका जीवन कृषि से जुड़ा रहा है। उन्होंने अमरावती स्थित शिवाजी कृषि महाविद्यालय से कृषि में स्नातक की पढ़ाई की। वर्षों के शोध और प्रयोगों के आधार पर उन्होंने शून्य बजट प्राकृतिक खेती की पद्धति विकसित की, जिसमें बिना रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के खेती की जाती है।

बताया कि उन्होंने बीस वर्षों तक वनस्पति का अध्ययन किया और 1989 से 1995 तक 154 शोध परियोजनाओं में अपने खेत में वन सिद्धांतों को लागू किया। देशभर में कई कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित कर चुके पालेकर को वर्ष 2016 में भारत सरकार ने देश के चौथे सर्वोच्च पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। अब सिसौली में होने वाले इस शिविर के जरिए वे किसानों को प्राकृतिक खेती की बारीकियां सिखाएंगे, जिससे खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके। राकेश टिकैत ने इस अवसर का लाभ उठाने के लिए किसानों से भारी संख्या में सिसौली पहुंचने का आह्वान किया है, बताया कि चार दिनों तक सिसौली में किसानों के ठहरने का पूरा प्रबंध किया जा रहा है। इसमें आसपास के जनपदों से भी किसानों के आने की संभावना है।






