खट्टा-मीठा बजट–उद्योग जगत हुआ निराशा, किसानों की भी टूटी आस

मुजफ्फरनगर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा संसद में शनिवार को बजट पेश किया गया। इसको लेकर देश के किसान नेताओं, व्यापारियों और उद्योगपतियों की प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी हैं। 12 लाख तक की आय को कर मुक्त करने के निर्णय को कुछ लोगों ने छलावा बताया तो कुछ ने इसे ऐतिहासिक निर्णय करार दिया है। उद्योग जगत भी बजट में किये गये कुछेक प्रावधानों को लेकर ही प्रशंसा करता दिखाई दे रहा, जबकि अधिकांश इसे खट्टा बजट ही बता रहे हैं। शेयर बाजार उत्साहित नहीं है, उद्योग निराश हुए हैं तो किसान नेताओं के अनुसार इस बजट से किसानों की आस भी टूटी है। आईये आप भी जानिए बजट पर किसने क्या कहा….

ये पूंजीपतियों का बजट, किसान को केवल कर्ज मिलाः राकेश टिकैत

भाकियू प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस बजट से किसानों के हाथ में केवल कर्ज ही आया है, उन्होंने इसे कॉरपोरेट पूंजीपतियों का बजट करार देते हुए एमएसपी गारंटी कानून और सी2 $ 50 फार्मूले की मांग कर रहे देश के किसान के साथ धोखा करार दिया। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि देश की केंद्र सरकार ने शनिवार को अपने तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया पूरे देश का अन्नदाता आशा लग रहा था कि शायद इस बजट में कुछ ऐसा हो जो देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले वर्ग को राहत पहुंचा सके लेकिन उनके हिस्से में सिर्फ कर्ज आया।

कहा कि इस बजट में गांव, गरीब, किसान, आदिवासी के लिए कुछ नहीं है। वह सरकारों के आंकड़ों में नजर आते हैं, लेकिन मूल आधारित ढांचे से मीलों दूर है। बढ़ती हुई महंगाई ग्रामीण परिवारों पर बोझ बन रही है, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा पर गहरा प्रभाव पहुंच रहा है। दूसरी तरफ सरकार फसलों के भाव न देकर कर्ज लेने पर मजबूर कर रही है। जब यह कर्ज बढ़ता चला जाएगा जमीन कॉर्पाेरेट के हवाले हो जाएंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि आज के इस बजट से यह प्रतीत होता है कि एमएसपी गारंटी कानून और सी2 $ 50 फार्मूले की मांग कर रहे देश के किसान को बजट में सिर्फ कर्ज मिला है। यह कॉरपोरेट पूंजीपत्तियों का बजट है। शिक्षा और चिकित्सा भी सिर्फ आंकड़ों में नजर आती है। जमीनी स्तर से इसका कोई लेना-देना नहीं है। सरकार आज नए लिबास में पुराने बजट में थोड़ा बहुत बदलाव करके पेश करने के लिए लेकर आई थी। यह बजट देशवासियों को आशा से निराशा की ओर लेकर गया है। कहा कि किसान-मजदूर के लिए यह बजट मात्र छलावा है देश के किसान इस बजट को सिरे से नकारते हैं, सरकार ने फिर से एक बार किसानों के साथ विश्वास घात किया है।

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देश के किसानों के लिए बजट में कुछ भी नयापन नहींः धर्मेंद्र मलिक

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने बजट पर कहा कि आज भारत सरकार द्वारा बजट पेश किया गया है। बजट में मिडिल क्लास, सर्विस सेक्टर की चिंता खूब दिखी, लेकिन किसान की चिंताओं को केवल शब्दों तक सीमित कर दिया है। इसमें करेंगे, कर रहे हैं जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। कहा कि किसान को बजट से चार उम्मीदें थी, किसानो को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, किसान सम्मान निधि को दोगुना किए जाने, फसल बीमा योजना में किसान के अंशदान को सुनिश्चित किए जाने जैसे विषयों को सरकार ने छुआ तक नहीं है।

किसान को सस्ते कर्ज की सीमा बढ़ाने के निर्णय का किसान स्वागत करते हैं, इसमें किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा पांच लाख रुपये तक की गई है। यह एक रूटीन बजट है, इससे किसान का कल्याण होगा ऐसा कहना उचित नहीं है, जो चल रहा है उसे ही आगे बढ़ाने का बजट है। ग्रामीण और किसान की अर्थव्यवस्था को 10 हजार लाख करोड़ के बूस्टर डोज की जरूरत थी, इससे ही शहर एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दूरी को कम किया जा सकता है।

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किसानों की आय बढ़ाने वाला बजट लाई केंद्र सरकारः अशोक बालियान

पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेरयमैन एवं वरिष्ठ किसान चिंतक अशोक बालियान ने शनिवार को पेश किये गये आम बजट को किसान हितैषी करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से किसानों के लिए हितकारी है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा इस बजट में खेती और खेतीहर व्यवस्था के लिए जो भी प्रावधान किये गये हैं, उनके लागू होने से निश्चित तौर पर किसानों की आय बढ़ेगी।

अशोक बालियान ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश का आम बजट पेश किया हैं। इसमें वित्त मंत्री ने किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाला )ण तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया है। वित्त मंत्री ने कहा है कि सब्जियों व फलों का उत्पादन बढ़ाने और लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए व्यापक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। केंद्रीय एजेंसियों में पंजीकरण और करार करने वाले किसानों से 4 साल के दौरान एजेंसियां दलहन खरीदेंगी। ऐसे में इस बजट में किए गए प्रावधानों से किसानों की आय बढ़ेगी।

शेयर बाजार में मायूसी, इसका मतलब बजट से उद्योग जगत खुश नहींः विपुल भटनागर

मुजफ्फरनगर। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पूर्व चेयरमैन उद्योगपति विपुल भटनागर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किये गये बजट में खटास ज्यादा बताते हुए कहा कि बजट के प्रस्तुतिकरण के बाद शेयर बाजार में मायूसी देखने को मिली, जिसका प्रमाण है कि केंद्र सरकार के इस बजट से देश को उद्योग जगत खुश नहीं हुआ है। इसमें मिठास वाली बातें बेहद कम देखने को मिली हैं। जबकि उन्होंने बजट में किये गये कई प्रावधानों को सराहनीय करार दिया है।

विपुल भटनागर ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किसी दौर में देश में एफडीआई की मंजूरी का पुरजोर विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आज अपनी सत्ता के दौर में इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश को खुली छूट देने का निर्णय लेकर अपने ही देश में देसी निवेश के लिए अस्तित्व की लड़ाई को और बढ़ाने का काम किया है। इससे चुनौती पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि देश में रिसर्च व डेवलपमेंट पर 20 हज़ार करोड़ का निर्णय स्वागत योग्य है। मेडिकल व आईआईटी में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और सीटें बढ़ाने के लिए निर्णय लेकर भी सरकार ने अच्छा कदम उठाया है। विपुल ने कहा कि सरकार ने इनकम टैक्स में 12 लाख तक की आमदनी को कर मुक्त करने के लिए दी राहत स्वागत योग्य निर्णय लिया है। एमएसएमई व स्टार्टअप्स के लिए कुछ सुविधाएं बढ़ाना भी सरकार का अच्छा कदम है। उनका कहना है कि यह बजट खट्टा ज्यादा और मीठा कम है, क्योंकि बजट के बाद शेयर बाजार में मायूसी ज्यादा देखने को मिली है। इससे उद्योग खुश नहीं हैं।

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केंद्र सरकार ने रोजगारपरक बजट पेश कियाः अमरकांत गुप्ता

मुजफ्फरनगर। आयकर के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरकांत गुप्ता ने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर में बड़ी छूट देकर साबित किया है कि वो मध्यम वर्गीय लोगों के लिए ताई हैं। वेतनभोगी और छोटे व्यापारियों को यह बड़ी राहत है।

रोजगारपरक बजट पेश करने का काम किया है। इस बजट के प्रावधानों के अनुसार उद्योगों को भी इससे बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण बजट सराहनीय है। इसमें हर वर्ग के कल्याण और देश की तरक्की के लिए कुछ न कुछ दिया गया है। देश को यह बजट रक्षा क्षेत्र में भी मजबूत बनायेगा और युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर भी इससे पैदा होंगे। 

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