आईएमए ने किया रिसेंट एडवांसेज इन एंजियोप्लास्टी पर सीएमई का आयोजन

मुजफ्फरनगर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के द्वारा चिकित्सा की आधुनिक तकनीक की जानकारी के लिए सर्कुलर रोड स्थित आई एम ए भवन में एक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

आईएमएस के मीडिया प्रभारी डा. सुनील सिंघल ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए अध्यक्ष डा. सुनील चौधरी और संचालन डा. अनिल कक्कड़ ने किया। सचिव डा. मनोज काबरा ने सभी का स्वागत व धन्यवाद किया। इस बार फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा से पधारे वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. संजीव गेरा ने रिसेंटएडवांसेज इन एंजियोप्लास्टी विषय पर व्याख्यान दिया और चिकित्सकों को इसकी बारीकियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आपका हृदय स्वास्थ्य आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। एथेरोस्क्लेरोसिस की गंभीर जटिलताओं, जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक को रोकने के लिए अक्सर एंजियोप्लास्टी आवश्यक होती है। एंजियोप्लास्टी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उपयोग कोरोनरी धमनी रोग के कारण बंद हो रही कोरोनरी धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है। यह ओपन-हार्ट सर्जरी के बिना हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह को बहाल करता है। एंजियोप्लास्टी आपातकालीन स्थिति में की जा सकती है, एंजियोप्लास्टी एक न्यूनतम चिकित्सा प्रक्रिया है जो धमनियों को खोलती है ताकि रक्त अधिक आसानी से प्रवाहित हो सके। बताया कि एंजियोप्लास्टी में एक छोटा मेडिकल गुब्बारा प्रयोग किया जाता है, जो प्लाक को उन स्थानों से बाहर धकेलता है जो बहुत संकीर्ण या अवरु( होते हैं। इस दौरान नई खुली धमनी को खुला रखने में मदद करने के लिए उसमें एक स्थायी स्टेंट लगाया जा सकता है या नहीं भी लगाया जा सकता है।

कहा कि एंजियोप्लास्टी आम तौर पर सुरक्षित प्रक्रिया है। वे बाईपास सर्जरी जैसी अन्य हृदय और संवहनी प्रक्रियाओं की तुलना में आसान व कम खर्चीला हैं। डॉ. संजीव गेरा ने युवा रोगियों में हृदय रोग के शुरुआती निदान और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। मूक हृदय रोग को पकड़ने के लिए लिपिड प्रोफाइल, व्यायाम, तनाव परीक्षण और हृदय का सीटी कैल्शियम स्कोर आवश्यक है। उन्होंने हृदय में रुकावटों के इलाज के लिए 3डी इमेजिंग और स्टेंट रहित एंजियोप्लास्टी जैसी नई तकनीकों के बारे में भी चर्चा की, खासकर बहुत युवा और बुजुर्ग रोगियों के लिए इसे बेहतर बताया।

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सीएमई में बताया गया कि हृदय रोग एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। डायबिटीज व उच्च रक्तचाप इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। हमारी जीवनशैली की कुछ आदतें, खानपान की ग़लत आदते, अत्याधिक वसायुक्त भोजन व अधिक नमक आदि का सेवन, तनाव पूर्ण जीवन, शराब का सेवन धूम्रपान, व्यायाम या अन्य शारीरिक परिश्रम का अभाव आदि इसके खतरे को बढ़ाते हैं। ऐसे लोगों के उपचार के लिए एंजियोग्राफी जैसी तकनीक वरदान साबित हुई है। बाद में प्रश्नोत्तर काल में विषय विशेषज्ञों ने उपस्थित चिकित्सकों की शंकाओं का समाधान भी किया गया। सभा में मुख्य रूप से मीडिया प्रभारी डा. सुनील सिंघल, डा. यश अग्रवाल, डा. डी एस मालिक, डा. एम के बंसल, डा. एम आर एस गोयल, डा. रमेश माहेश्वरी, डा. आर एन गंगल, डा. ईश्वर चन्द्रा, डा. आमोद कुमार, डा. अनिल सिंह, डा. पंकज जैन, डा. सत्यम राजवंशी, डा. अनुभव सिंघल, डा. अनिल राठी, डा. मनीष अग्रवाल, डा. अखिल गोयल, डा. पी के चाँद, डा. अशोक शर्मा, डा. रवींद्र जैन, डा. हेमंत शर्मा, डा. पंकज अग्रवाल, डा. डी पी सिंह, डा. विनीत मिनोचा, डा. अजय सिंघल, डा. डी के शर्मा, डा. पंकज सिंह, डा. राजीव काम्बोज, डा. अरविंद सैनी, डा. सुजीत कुमार सिंह, डा. ललिता माहेश्वरी, डा. निशा मलिक आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में अतुल कुमार व दीपक कुमार का विशेष सहयोग रहा। 

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