सभासद राजीव शर्मा की शिकायत के बाद गिरी गाज, नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर भी घिरा शिकंजा, मुख्य वन संरक्षक से तलब हुई रिपोर्ट
मुज़फ्फरनगर। जनपद के ऐतिहासिक कंपनी बाग में फलदार हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला अब बड़े प्रशासनिक निर्णयों तक पहुंच चुका है। भाजपा सभासद की शिकायत के बाद वन विभाग की भूमिका पर उठे सवालों ने न केवल जिले में हलचल मचा दी है, बल्कि शासन स्तर तक जांच की प्रक्रिया को गति दे दी है। फलस्वरूप आरोपों के घेरे में आए जिला वन अधिकारी का गैर जनपद तबादला कर दिया गया है, जबकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
नगरपालिका परिषद् मुजफ्फरनगर के मेरठ रोड स्थित कंपनी बाग में निर्माण कार्य के दौरान हरे-भरे फलदार पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। भाजपा नेता एवं सभासद राजीव शर्मा की शिकायत के बाद इस प्रकरण में वन विभाग समेत नगरपालिका परिषद् के भी कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। सभासद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि कंपनी बाग में अमरूद, लीची, आम, बैल पत्थर आदि के फलदार पेड़ों को जल निगम की सीएंडीएस शाखा के ठेकेदार की मिलीभगत से काटा गया। उन्होंने इस पूरे मामले में वाटिका प्रभारी एवं नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय प्रताप शाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए विस्तृत जांच की मांग की थी।
इसके बाद नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह ने वन विभाग को पत्र लिखकर कटे हुए पेड़ों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट देने को कहा था। वन विभाग ने अपनी रिपोर्ट में ठेकेदार पर मात्र 3,000 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया, जिसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सभासद राजीव शर्मा ने इस मूल्यांकन रिपोर्ट को गलत बताते हुए शासन से कठोर कार्रवाई की मांग उठाई थी। उनकी शिकायत के बाद शासन स्तर से मामले को गंभीरता से लिया गया और विभागीय जांच शुरू हुई।
जानकारी के अनुसार, गलत मूल्यांकन रिपोर्ट के आरोपों के बीच शासन के द्वारा जिला वन अधिकारी राजीव कुमार का तबादला अमरोहा कर दिया गया है। वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजीव कुमार को अमरोहा में तैनात किया गया, अमरोहा में उन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। कहा जा रहा है कि बिना किसी वैध अनुमति के फलदार वृक्षों को काटने और उसके बाद विवादित मूल्यांकन रिपोर्ट भेजे जाने के चलते यह कार्रवाई की गई है।
इधर सभासद राजीव शर्मा द्वारा नगर स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ की गई शिकायत की जांच भी तेजी पकड़ चुकी है। राजीव शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष सचिव ईशान किशन ने 27 नवंबर को इस संबंध में जांच के आदेश जारी किए थे। इसके बाद 4 दिसंबर को अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी। अब 9 दिसंबर को मुख्य वन संरक्षक से एक विस्तृत आख्या तलब की गई है। शर्मा ने जानकारी दी कि शासन की यह जांच जल्द ही जिला मुख्यालय पहुंचेगी, और वह इसमें अपने दावे के समर्थन में सभी साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा पर सबकी नज़र टिकी रहेगी।






