ईरान युद्धविराम के बाद भी नहीं थमे वार, तेहरान ने किया पलटवार

अमेरिका से हुए ईरान युद्धविराम के कुछ ही समय बाद बुधवार को भी हमले नहीं रुके। ईरान के लावन द्वीप पर एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ, जिसे ईरानी अधिकारियों ने दुश्मन का हमला बताया। वहीं, इन हमलों के जवाब में तेहरान ने यूएई और कुवैत पर नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि बहरीन ने भी अपनी राजधानी मनामा पर हमले की बात कही। ईरानी तेल मंत्रालय के समाचार मंच शाना के मुताबिक, नेशनल ईरानी ऑयल रिफाइनिंग एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने बताया कि इस केंद्र पर स्थानीय समय के अनुसार सुबह लगभग १०:०० बजे हमला हुआ।

इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आग पर काबू पाने और जगह को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा और अग्निशमन टीमों को तुरंत तैनात कर दिया गया। ताजा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि युद्धविराम की घोषणा के बावजूद जमीन पर हालात सामान्य नहीं हुए हैं। एक तरफ ईरान ने अपनी तेल रिफाइनरी पर हमले की जानकारी दी, तो दूसरी तरफ खाड़ी देशों ने तेहरान की ओर से हमलों का आरोप लगाया। ईरान की सरकारी मीडिया ने बुधवार को बताया कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों यूएई और कुवैत पर नए मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए।

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इसे उसकी तेल सुविधा पर हुए हवाई हमलों का बदला बताया गया। कुवैत ने कहा कि घंटों तक चले हमलों की ताजा लहर में उसकी तेल सुविधा, पावर प्लांट और डीसैलिनेशन प्लांट को नुकसान हुआ। साथ ही कुवैत ने ईरान से अपने हमले रोकने की मांग की। यूएई ने कहा कि वह ईरानी हमलों को रोक रहा है। वहीं, बहरीन ने भी कहा कि उसकी राजधानी मनामा पर हमला हुआ है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर हुआ हमला रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। यही कारण रहा कि घटना के तुरंत बाद सुरक्षा और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेज दिया गया।

कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और कड़ा कर दिया गया है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरानी सभ्यता को मिटा देने जैसी धमकियों से अंतिम समय में पीछे हटने के बाद ईरान, अमेरिका और इजराइल दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए थे। फिलहाल, इस समझौते की शर्तों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी अभी साफ नहीं है कि यह व्यवस्था स्थायी शांति में बदल पाएगी या नहीं, क्योंकि दोनों पक्षों ने शर्तों को लेकर बिल्कुल अलग-अलग दृष्टिकोण पेश किए हैं।

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युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान की ओर से मिसाइल हमले की सूचना दी। वहीं, कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी सेना ड्रोन हमलों का जवाब दे रही है। इसी बीच, ईरान ने अपनी एक तेल रिफाइनरी पर हमले की बात कही। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को नाजुक युद्धविराम बताया। संकेत यह भी मिले कि बातचीत जल्द शुरू हो सकती है, लेकिन समझौते के कई पहलू अब भी अस्पष्ट हैं। ईरान ने कहा कि इस समझौते से उसे होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की नयी व्यवस्था को औपचारिक रूप देने की अनुमति मिल जाएगी।

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हालांकि, इस शर्त को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। यह भी ज्ञात नहीं है कि कोई अन्य देश इस शर्त पर सहमत है या नहीं। पाकिस्तान, जिसने समझौते में मध्यस्थता करने में मदद की, और अन्य देशों ने कहा कि वे लेबनान में लड़ाई रोक देंगे। वहां इजराइल ने ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आतंकवादी समूह के खिलाफ जमीनी आक्रमण शुरू किया है। हालांकि, इजराइल ने साफ कहा है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय तनाव सिर्फ एक मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि कई दिशाओं में फैला हुआ है।

ताजा घटनाएं यह दिखाती हैं कि ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद भी क्षेत्र में भरोसे की कमी बनी हुई है। रिफाइनरी पर हमला, खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई और समझौते की अस्पष्ट शर्तें इस बात का संकेत हैं कि हालात अब भी बेहद नाजुक हैं। युद्धविराम कागज पर भले मौजूद हो, लेकिन जमीन पर हमलों का सिलसिला रुकता नहीं दिख रहा।

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