खतौली, 2 मार्च। खतौली आर्य समाज होली उत्सव की प्रथम सभा में अमित कुमार शास्त्री सहारनपुर ने कहा कि वेद की शरण में आने पर ही विश्व में शांति संभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के संदेश को दोहराते हुए वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया। सभा में आध्यात्मिक वातावरण के बीच यज्ञ, भजन और प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया। अमित कुमार शास्त्री ने कहा कि श्रद्धा से जीवन को यज्ञमय बनाना चाहिए।
उन्होंने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि परिस्थितिवश समय पर दूध, घी, वनस्पति, औषधि, समिधा और जल भी उपलब्ध न हो, तो भी आंख बंद कर मंत्रों का मौन उच्चारण करते हुए स्वाहा-स्वाहा कहते हुए यज्ञ किया जा सकता है। उन्होंने माता-पिता की सेवा को भी जीवन का सर्वोच्च धर्म बताते हुए उपस्थित जनों से इसका पालन करने का आवाहन किया। आचार्य कंवरपाल शास्त्री ने कहा कि होली का उत्सव सृष्टि के आदि काल से मनाया जाता रहा है।

उन्होंने बताया कि वेद में इसे नव अन्न के आगमन पर किए जाने वाले यज्ञ के रूप में वर्णित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रहलाद और होलिका की कथा बाद में जोड़ी गई। इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन उपदेशक मोहित शास्त्री बिजनौर ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा, हीरा जन्म मिला तो व्यर्थ गंवाया, न यहां का रहा न वहां का रहा। महाशय जगमाल आर्य और सुरेन्द्र आर्य ने भी सुंदर भजन प्रस्तुत किए। राजेंद्र विश्वकर्मा के आवास पर संपन्न यज्ञ में गोपालकृष्ण पत्नी सहित यजमान रहे। पुरोहित रामदेव शास्त्री और अजेश आर्य ने विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराया।
कार्यक्रम में शोभाराम आर्य, चौधरी सुरेंद्र सिंह आर्य, महेश आनंद आर्य, सतीश ऋषिपाल आर्य, जगदीश प्रधान, धीरेंद्र आर्य, जयपालसिंह, देवेंद्र टिटोडा, भगवान सिंह, सुशील आर्य, सुनील आर्य, राजकुमार, शशिपाल, लाला बुद्धसिंह, पूरनसिंह आर्य सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। खतौली आर्य समाज होली उत्सव का यह आयोजन श्रद्धा, वैदिक परंपरा और सामाजिक संदेश का संगम बनकर सामने आया।






