लखनऊ में UP ATS ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर रेलवे ढांचे और अन्य अहम ठिकानों को निशाना बनाने की कथित साजिश रचने का आरोप है। एजेंसी के अनुसार, यह समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों के संपर्क में था और रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम समेत महत्वपूर्ण स्थलों की रेकी कर रहा था।
ATS के मुताबिक, आरोपियों को 2 अप्रैल 2026 को उस समय पकड़ा गया जब वे लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेल लाइन और सिग्नल सिस्टम को आगजनी या विस्फोट से नुकसान पहुंचाने की तैयारी में थे। एजेंसी का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ी तोड़फोड़ की योजना नाकाम हुई।
गिरफ्तार लोगों में साकिब उर्फ डेविल को मुख्य आरोपी बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक वह मेरठ का रहने वाला है और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal) और इंस्टाग्राम (Instagram) के जरिए हैंडलरों से जुड़ा था। बाकी आरोपियों में विकास गहलावत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू और अरबाब शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार दो आरोपी मेरठ और दो गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।
सोशल मीडिया, गूगल लोकेशन और QR पेमेंट का आरोप
ATS का कहना है कि यह मॉड्यूल सिर्फ ऑनलाइन संपर्क तक सीमित नहीं था। जांच में एजेंसी ने आरोप लगाया है कि हैंडलर संभावित टारगेट की गूगल लोकेशन (Google location) भेजते थे, जिनके आधार पर आरोपी रेकी करते थे। एजेंसी का यह भी दावा है कि कुछ छोटी आगजनी की घटनाओं के वीडियो हैंडलरों को भेजे गए और बदले में क्यों आर कोड (QR code) के जरिये पैसे मिले।
रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपियों पर राजनीतिक व्यक्तियों और महत्वपूर्ण संस्थानों की निगरानी कर जानकारी साझा करने का भी आरोप है। ATS ने कहा कि गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ में कई जगहों की रेकी की गई थी। यही इस केस का सबसे गंभीर हिस्सा है, क्योंकि मामला केवल ऑनलाइन कट्टरता नहीं, बल्कि जमीन पर टारगेट सिलेक्शन तक पहुंचा हुआ बताया जा रहा है।
बरामदगी में 7 स्मार्टफोन और ज्वलनशील पदार्थ
एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक ज्वलनशील पदार्थ से भरा कैन, 7 स्मार्टफोन, 24 पर्चे/पम्पलेट और पहचान दस्तावेज बरामद किए गए। यही डिजिटल और भौतिक सामग्री अब जांच की अगली सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है, क्योंकि इन्हीं से नेटवर्क, संपर्क और संभावित टार्गेट्स की और जानकारी निकल सकती है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मुख्य आरोपी नाई का काम करता था और उसी की आड़ में गतिविधियां चल रही थीं। हालांकि यह भी फिलहाल एजेंसी की जांच का हिस्सा है और इसकी अंतिम पुष्टि अदालत में पेश साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
ATS थाने, लखनऊ में इस मामले में BNS की धाराएं 148, 152, 61(2) और UAPA की धाराएं 13 और 18 लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है और आगे की पूछताछ जारी है। सुरक्षा एजेंसियों ने रेलवे और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के आसपास सतर्कता भी बढ़ाई है।






