ब्लड बैंक कार्रवाई: मुजफ्फरनगर के 4 केंद्रों पर ताला

मुजफ्फरनगर। FSDA ब्लड बैंक कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में चल रहे चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसायटी आधारित रक्त केंद्रों की जांच के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। विभागीय जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 7 ब्लड केंद्रों पर तत्काल रोक लगा दी गई है। सबसे बड़ा झटका मुजफ्फरनगर को लगा, जहां 4 केंद्रों का संचालन बंद कराया गया।

जांच में जो तस्वीर सामने आई, वह चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक कई केंद्रों पर अनिवार्य ELISA टेस्ट नहीं हो रहे थे, कोल्ड चेन ठीक से मेंटेन नहीं थी, और रक्तदाता व रक्त प्राप्तकर्ताओं का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला। कुछ जगहों पर बिना परीक्षण रिकॉर्ड के रक्त का थोक ट्रांसफर तक पाया गया।

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यानी सवाल सिर्फ कागजी कमी का नहीं है। सवाल सीधा मरीजों की सुरक्षा का है। खून की जांच और भंडारण में चूक का मतलब सीधा खतरा है—और यहीं से यह कार्रवाई साधारण निरीक्षण नहीं, जनस्वास्थ्य का मामला बन जाती है। यह निष्कर्ष रिपोर्ट की बताई गई खामियों के आधार पर निकाला गया है।

13 जिलों में 36 केंद्र जांचे गए, 7 पर तुरंत रोक

FSDA की अंतरजनपदीय टीमों ने 13 जिलों में 36 ब्लड बैंकों की जांच की। इनमें मुजफ्फरनगर में 6 और बरेली में 6, इटावा, रायबरेली और मुरादाबाद में 5-5, कुशीनगर में 2, और आगरा, जौनपुर, अमरोहा, बलरामपुर, बागपत, मैनपुरी और भदोही में 1-1 केंद्र शामिल थे। जांच के बाद 7 केंद्रों पर रक्त संचालन से जुड़े सभी काम रोक दिए गए, जबकि बाकी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

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रिपोर्ट में जिन 7 केंद्रों पर रोक का जिक्र है, उनमें इटावा के अचिंत्य चेरिटेबल ब्लड सेंटर और मानव सेवा चेरिटेबल ब्लड सेंटर, बरेली का लायंस चेरिटेबल ब्लड सेंटर, और मुजफ्फरनगर के जीवांश चेरिटेबल ब्लड सेंटर, सर्वोदया चेरिटेबल ब्लड सेंटर, एसडी मेडिकल इंस्टीट्यूट और दुर्गा चेरिटेबल ब्लड सेंटर शामिल हैं।

7 में से 4 बंद केंद्र अकेले मुजफ्फरनगर में होने का मतलब है कि जिले में चैरिटेबल ब्लड बैंक व्यवस्था पर अब ज्यादा कड़ी निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है। यह एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष है, जो रिपोर्टेड सूची के अनुपात पर आधारित है।

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ELISA नहीं, स्टाफ नहीं, रिकॉर्ड नहीं

रिपोर्ट में जिन कमियों का जिक्र है, वे मामूली नहीं हैं। कई केंद्रों पर ELISA टेस्ट नहीं किए जा रहे थे। कुछ जगहों पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित मिले। अभिलेखों के सत्यापन में रक्त जारी करने और लेने का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला।

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