मां-बेटी से छेड़छाड़ में वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुआ था मुकदमा, परिजनों के आरोपों पर एसपी सिटी ने दी सफाई, कहा-गंभीर एक्शन लिया
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में देर रात के समय घर के बाहर पाॅश कालोनी नई मंडी में टहल रही युवती और उसकी मांग के साथ हुई छेड़छाड़ की एक घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आरोपियों की पहचान और उनकी राजनीतिक रसूख वाली पहुंच के दबाव में हाईप्रोफाइल मामले में उनको त्वरित जमानत ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया, जबकि पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर असंतोष में नजर आया। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे और हल्की धाराओं में कार्यवाही के कारण आरोपियों को कानूनी राहत मिलने से पीड़ित परिवार में भय की बात भी सामने आई और विरोध भी हो रहा है, ऐसे में अपना बचाव करने के लिए मुजफ्फरनगर पुलिस के अधिकारी अब सफाई पेश कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि नई मंडी थाना क्षेत्र में 17 अप्रैल 2026 की देर रात मां-बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना ने तूल पकड़ लिया था। आरोप था कि स्कूटी सवार दो युवक, जो शराब के नशे में थे, ने सड़क पर टहल रही युवती और उसकी मां के साथ अभद्र व्यवहार किया। दोनों ने न केवल फब्तियां कसीं, बल्कि घर में घुसने तक की धमकी भी दी। विरोध करने पर आरोपियों ने पुलिस को चुनौती देते हुए कहा था कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शुरुआती स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में जब आरोपियों का माफी मांगते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब युवती के भाई की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आया कि एक आरोपी पूर्व कैबिनेट मंत्री सुधीर बालियान का बेटा आर्यमान रघुवंशी था, जबकि दूसरा उसका दोस्त शौर्य गुप्ता बताया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को हवालात में रखा गया, जहां से माफी मांगते हुए उनका वीडियो भी सामने आया। हालांकि, गिरफ्तारी के महज तीन घंटे बाद ही दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई। इस पूरी कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि राजनीतिक दबाव के चलते आरोपियों पर हल्की धाराएं लगाई गईं, जिससे उन्हें जल्दी जमानत मिल गई।
परिजनों का यह भी आरोप था कि इस तरह की कार्रवाई से उनके परिवार में भय का माहौल पैदा हो गया है। मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जिया चैधरी ने पुलिस की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना था कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में पुलिस का रवैया अलग होता है, जिससे आम जनता का विश्वास कमजोर होता है। वहीं, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया। नई मंडी कोतवाली प्रभारी ने कहा कि मुकदमा जांच के आधार पर दर्ज किया गया और यदि आगे जांच में गंभीर तथ्य सामने आते हैं, तो धाराओं में बढ़ोतरी की जाएगी।
इसी बीच पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन को भी सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने अपने बयान में कहा कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को तीन घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया था। करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें सक्षम न्यायालय में पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में सुसंगत धाराओं में ही अभियोग पंजीकृत किया गया था और हल्की धाराएं लगाने के आरोप निराधार हैं। फिलहाल, यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और न्याय प्रक्रिया को लेकर बहस का विषय बना हुआ है, जबकि पीड़ित परिवार सख्त कार्रवाई की मांग पर कायम है।






