धनतेरस पर जिला अस्पताल के सफाई कर्मियों ने झाड़ू-तसले लेकर सीएमओ दफ्तर घेरा

वेतन न मिलने से मायूस सफाई कर्मचारियों ने जताया आक्रोश, कहा-त्यौहार मनाने से भी वंचित

मुजफ्फरनगर। धनतेरस जैसे शुभ पर्व पर जब शनिवार को लोग खरीदारी और उत्सव की तैयारी में व्यस्त हैं, जिला अस्पताल के सफाई कर्मचारी वेतन न मिलने की पीड़ा लेकर सीएमओ कार्यालय का घेराव करते हुए अपने सफाई उपकरणों के साथ काम बंद कर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला, जिससे न सिर्फ उनके घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, बल्कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार को भी वे अब मनाने की स्थिति में नहीं हैं।
धरने पर बैठे सफाई कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे इस बार दीपावली घर नहीं जाएंगे, बल्कि अस्पताल परिसर में ही धरना जारी रखेंगे। महिला सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया कि सैलरी की मांग करने पर उन्हें काम करने से मना कर दिया जाता है, और तानों का सामना करना पड़ता है। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. संजय वर्मा धरनास्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों से बात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दीपावली से पहले वेतन दिलवाने की पूरी कोशिश की जाएगी।
डॉ. वर्मा ने मीडिया कर्मियों को बताया कि जिला अस्पताल में कार्यरत ये सभी सफाई कर्मचारी ठेके पर नियुक्त हैं और इनका भुगतान संबंधित कंपनी द्वारा किया जाता है। कंपनी का कहना है कि तकनीकी कारणों से उनका पोर्टल काम नहीं कर रहा, इसलिए वेतन नहीं भेजा जा सका है। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि यह तकनीकी खराबी का बहाना उन्हें हर महीने सुनने को मिलता है, लेकिन हालात अब असहनीय हो चुके हैं।
धरने में शामिल एक महिला कर्मचारी ने कहा कि हम त्योहार तो दूर, बच्चों की स्कूल फीस और घर का राशन भी नहीं चला पा रहे। अधिकारियों से कहते हैं तो बोलते हैं दृ जब तक सैलरी नहीं आती, तब तक काम पर मत आना। क्या इंसान बिना काम और बिना पैसे के जी सकता है? कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के डॉक्टर और स्थानीय प्रशासन ने कई बार उन्हें सहयोग का भरोसा दिलाया है, लेकिन सफाई सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी की लापरवाही से समस्या लगातार बनी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि जब सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था सफाई कर्मियों के भरोसे है, तो उनके साथ हो रही इस उपेक्षा पर प्रशासनिक कार्रवाई कब होगी? त्योहारी सीजन में अगर मेहनतकश सफाई कर्मी ही दुखी और भूखे रहेंगे, तो दीपावली की रोशनी भी अधूरी सी लगेगी।

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