पेट्रोल-डीजल टैक्स घटा है और इसके साथ ही केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। सरकार के फैसले से पहले: पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क: ₹13 प्रति लीटर, डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क: ₹10 प्रति लीटर अब: पेट्रोल: घटाकर ₹3 प्रति लीटर, डीजल: पूरी तरह समाप्त यानी दोनों ईंधनों पर करीब ₹10 प्रति लीटर तक राहत दी गई है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यह फैसला वैश्विक कीमतों के दबाव से देश को बचाने और घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए लिया गया है। सरकार ने सिर्फ कीमतों पर ही नहीं, बल्कि ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात पर भी नियंत्रण किया है।
डीजल निर्यात पर: ₹21.5 प्रति लीटर ड्यूटी, एटीएफ पर: ₹29.5 प्रति लीटर ड्यूटी इसका उद्देश्य देश में ईंधन की कमी को रोकना है। हाल ही में निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए थे। कंपनी के देशभर में 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं डीलरों ने कीमत वृद्धि पर चिंता जताई, कुछ स्थानों पर सप्लाई में कटौती की भी जानकारी मिली तेल कंपनियों के लिए चुनौती सरकार के इस फैसले से हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों पर कीमत स्थिर रखने का दबाव बढ़ सकता है।
खासकर तब, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद: कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, बाद में गिरकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर आया यह अस्थिरता भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि: अगर वैश्विक कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भविष्य में फिर से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं फिलहाल, पेट्रोल-डीजल टैक्स घटा का यह फैसला आम लोगों को कुछ राहत जरूर देगा, लेकिन बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।






