संभल। संभल हिंसा प्रकरण में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अनुज चौधरी समेत कुल 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत द्वारा पारित किया गया।
मामला हिंसा के दौरान एक युवक को कथित रूप से गोली लगने से जुड़ा है। पीड़ित युवक के पिता की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
युवक को गोली मारने का आरोप, पिता ने लगाई थी याचिका
नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2025 को CJM कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि उनका बेटा आलम (24 वर्ष) 24 नवंबर 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने के लिए घर से निकला था। आरोप है कि शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी।
याचिकाकर्ता ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, संभल कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया था।
9 जनवरी को हुई सुनवाई, अब सामने आया आदेश
इस मामले में 9 जनवरी 2026 को अदालत में सुनवाई हुई थी। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। मंगलवार को जब यह आदेश सार्वजनिक हुआ, तब पूरे मामले की जानकारी सामने आई।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने डर के कारण पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया था। उन्होंने पुष्टि की कि अदालत ने पूर्व सीओ अनुज चौधरी, पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि देर शाम आदेश जारी होने के कारण उन्हें अभी तक कोर्ट की लिखित प्रति प्राप्त नहीं हो सकी है।
वर्तमान तैनाती
बताया जा रहा है कि अनुज चौधरी वर्तमान में फिरोजाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि अनुज तोमर इस समय संभल जिले की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के समय अनुज चौधरी सीओ संभल के पद पर कार्यरत थे, बाद में उन्हें पदोन्नति मिली।
24 नवंबर 2024 को भड़की थी संभल हिंसा
गौरतलब है कि संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि यह स्थल पहले हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में बाबर द्वारा तुड़वाकर मस्जिद में परिवर्तित किया गया। इस दावे को लेकर 19 नवंबर 2024 को संभल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
उसी दिन सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह ने मस्जिद परिसर में सर्वे का आदेश देते हुए अधिवक्ता रमेश सिंह राघव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। 24 नवंबर को सर्वे के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई और हालात बिगड़ गए। भीड़ द्वारा पथराव के बाद हिंसा भड़क उठी, जिसमें गोली लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिसकर्मी भी हुए थे घायल
हिंसा के दौरान एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, एक डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात पर काबू पाने के बाद पुलिस ने तीन महिलाओं सहित 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया था।
संभल कोतवाली और थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए थे।
SIT की चार्जशीट
18 जून को गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने 1128 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सांसद बर्क सहित 23 लोगों को आरोपी बनाया गया। हालांकि सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया था।






