शशि थरूर क्यों नाराज़ हैं? कोच्चि कार्यक्रम से उठा सियासी सवाल

नई दिल्ली/कोच्चि। कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर एक बार फिर पार्टी के भीतर असहजता की खबरें सामने आ रही हैं। केरल के कोच्चि में हाल ही में आयोजित एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के बाद थरूर के कथित तौर पर नाराज होने की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें स्वयं को उपेक्षित महसूस हुआ, जिससे उनका असंतोष खुलकर सामने आया।

यह नाराजगी ऐसे वक्त उभरी है, जब केरल की सियासत और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पहले ही रणनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है।

कोच्चि कार्यक्रम में क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोच्चि में आयोजित इस महापंचायत कार्यक्रम को लेकर पहले यह तय किया गया था कि शशि थरूर के संबोधन के बाद सीधे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का भाषण होगा। इस क्रम में थरूर की वरिष्ठता और राजनीतिक हैसियत बनी रहती।

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हालांकि कार्यक्रम के दौरान तय प्रोटोकॉल में बदलाव हुआ। राहुल गांधी से पहले कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं को मंच से बोलने का मौका दिया गया। बताया जा रहा है कि इसी बदलाव ने शशि थरूर को असहज कर दिया और उन्हें लगा कि उनके कद और भूमिका को नजरअंदाज किया गया है।

नाम न लिए जाने से बढ़ी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, थरूर की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी रही कि राहुल गांधी के भाषण के दौरान उनका नाम तक नहीं लिया गया। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद होने के बावजूद सार्वजनिक मंच से अनदेखी किए जाने को थरूर ने अपमानजनक माना।

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पार्टी के अंदरखाने यह चर्चा है कि इसी घटना के बाद थरूर ने अपनी नाराजगी जाहिर की और यह सवाल उठाया कि पार्टी में उनके योगदान को आखिर किस नजर से देखा जा रहा है।

केरल चुनाव से पहले क्यों अहम है यह विवाद?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल विधानसभा चुनाव से पहले शशि थरूर का असंतोष कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन सकता है। थरूर न केवल केरल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं।

बीते कुछ समय में उनके कई ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की खुलकर सराहना की है। कुछ मुद्दों पर उन्होंने केंद्र सरकार के फैसलों का समर्थन भी किया है, जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग माने गए।

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सियासी मायने और अंदरूनी संदेश

यही वजह है कि थरूर की कथित नाराजगी को सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं देखा जा रहा। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संवाद और सम्मान से जुड़े बड़े सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि शशि थरूर ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस पूरे मामले पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी सूत्र मानते हैं कि यह मुद्दा कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को उजागर करता है और आने वाले समय में इसकी गूंज और तेज हो सकती है।

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