भारत-अमेरिका ट्रेड डील कृषि और डेयरी सेक्टर पर संकटः धर्मेन्द्र मलिक

किसान नेता ने कहा-भारतदृअमेरिका व्यापार समझौते पर संदेह कायम, अभी तस्वीर साफ नहीं, सस्ता आयात बना देश के किसानों की चिंता

मुजफ्फरनगर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर देशभर में सियासी और सामाजिक हलकों में बहस तेज़ हो गई है। इस समझौते को लेकर जहां केंद्र सरकार लगातार सड़क से लेकर संसद तक सफ़ाई दे रही है, वहीं किसान संगठनों का कहना है कि सरकार संसद और देश के किसानों को गुमराह कर रही है। किसान नेताओं का आरोप है कि इस डील के ज़रिये कृषि और डेयरी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने भी इस डील को देश के किसानों के भविष्य के लिए खतरनाक बताते हुए विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इसके होने से देश में कृषि और डेयरी सेक्टर पर गंभीर संकटल की आशंका बन रही है।
भारतदृअमेरिका ट्रेड डील को लेकर देशभर में किसान संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि संसद में सरकार की ओर से दिए जा रहे जवाब और किए जा रहे दावे संदेह के घेरे में हैं। किसान संगठनों को आशंका है कि इस डील के माध्यम से कृषि और डेयरी क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए खोला जा सकता है, जिसका सीधा असर देश के किसानों की आमदनी पर पड़ेगा।
इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में जवाब दिए जाने के बावजूद भी भारतदृअमेरिका ट्रेड डील को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है। धर्मेन्द्र मलिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले कई दिनों से सड़क से लेकर संसद तक भारतदृअमेरिका ट्रेड डील को लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन संसद में दिया गया जवाब केवल एक कानूनी दस्तावेज़ भर होता है, जो ज़मीनी सच्चाई को पूरी तरह उजागर नहीं करता।
उन्होंने कहा कि संसद में वाणिज्य मंत्री और कृषि मंत्री यह दावा कर रहे हैं कि इस ट्रेड डील में कृषि और डेयरी उद्योग से संबंधित कोई समझौता अमेरिका के साथ नहीं किया गया है, जबकि अमेरिका की ओर से दिए गए अधिकृत बयान केन्द्र सरकार के इन दावों के विपरीत संकेत देते हैं। इससे सरकार की मंशा और नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसान नेता ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को किसी भी हाल में कृषि और डेयरी उद्योग से जुड़ा कोई समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सस्ता विदेशी आयात देश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने से रोकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है। धर्मेन्द्र मलिक ने यह भी कहा कि जब तक सरकार इस ट्रेड डील की पूरी तस्वीर देश और किसानों के सामने स्पष्ट नहीं करती, तब तक किसान संगठनों का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें:  दुष्कर्म से आहत नाबालिग ने खाया जहर, गंभीर

Also Read This

अल्मोड़ा जंगलों में आग से धुआं फैलाः अस्पताल में बढ़े मरीज

अल्मोड़ा जंगलों में आग की घटनाओं ने अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। जंगलों से उठ रहा धुआं और वातावरण में फैली धुंध के कारण जिला अस्पताल में आंखों में जलन, सिरदर्द और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा। जिले के विभिन्न जंगलों में लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे जहां वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पूरे क्षेत्र में धुआं और धुंध फैलने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जंगलों से उठ रहे धुएं का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा

Read More »

यूपी बोर्ड कॉपी जांच 2026: 18 मार्च से शुरू होगा मूल्यांकन

यूपी बोर्ड कॉपी जांच 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की कापियों का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर 1 अप्रैल तक किया जाएगा। क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय के अंतर्गत आने वाले 53 केंद्रों पर मूल्यांकन कार्य संपन्न कराया जाएगा। बोर्ड की वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 12 मार्च को समाप्त होंगी। परीक्षा समाप्त होने से पहले ही बोर्ड ने मूल्यांकन की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में कुल पांच केंद्रों पर कापियों का मूल्यांकन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से निम्न संस्थान शामिल हैं: पीएमश्री राजकीय इंटर कालेज बेगमपुल रोड, डीएन इंटर कालेज रेलवे रोड चौराहा, एसएसडी

Read More »

दुबई में फंसे भारतीय: टिकट तीन गुना महंगे, घर लौटना मुश्किल

दुबई में फंसे भारतीय इन दिनों भारी दहशत और अनिश्चितता के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देशों में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। आसमान से गिरती मिसाइलों और धमाकों की गूंज ने वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की नींद उड़ा दी है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रटौल गांव का रहने वाला दानिश किसी तरह अपनी जान बचाकर दुबई से ओमान पहुंचा है। उसने वीडियो कॉल के जरिए वहां के हालात बताते हुए कहा कि हालात बेहद डरावने हो चुके हैं। दानिश ने बताया कि दुबई जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में भी अब मिसाइल

Read More »