दूसरों के लिए फतवा लेने वाले अपने गिरेबां में झांकेंः मौलाना उस्मान लुधियानवी

गांव तावली स्थित मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में आयोजित जलसे में पंजाब के शाही इमाम ने दिखाया मुआशरे को आईना

मुजफ्फरनगर। जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव तावली स्थित मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया में बुधवार को सालाना जलसा एवं दस्तरबंदी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर दीनी तालीम पूरी करने वाले 54 तालिब ए इल्म की दस्तरबंदी की गई। कार्यक्रम में 13 छात्रों ने मुफ्ती, 12 ने आलिम, 20 ने हाफिज, छह ने क़ारी और दस छात्रों ने आलिम की डिग्री हासिल की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी रहे। उन्होंने मदरसे के छात्रों को पगड़ी पहनाकर और गले में मेडल डालकर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपनी तकरीर में उन्होंने इस्लाम के मूल संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस्लाम प्रेम, मोहब्बत और भाईचारे का धर्म है। हमें अपने वतन, अपने मुल्क और समाज के सभी लोगों से मोहब्बत करना चाहिए और पूरी दुनिया को इंसानियत का पैगाम देना चाहिए। इस दौरान शाही इमाम ने समाज में फतवों की बढ़ती प्रवृत्ति पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि आज हर किसी को फतवा चाहिए। किसी को प्रधान के खिलाफ फतवा चाहिए, किसी को मौलवी के खिलाफ, किसी को अपने भाई के खिलाफ, यहां तक कि किसी को पड़ोसी के खिलाफ भी फतवा चाहिए। लेकिन कोई भी अपने लिए फतवा लेने नहीं जाता। उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा करते हैं कि वे जो कहते हैं, मुंह पर कहते हैं, ऐसे लोगों से बड़ा बेईमान और नालायक कोई नहीं हो सकता। सच्चाई यह है कि आत्ममंथन से लोग बचते हैं और अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते।
मीडिया से बातचीत में मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जो बच्चे परीक्षा में पिछड़ जाते हैं, उन्हें दोबारा आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता, जबकि अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को आसानी से अवसर मिल जाते हैं। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और मदरसों से अपील की कि पढ़ाई में पीछे रह गए बच्चों को एक और मौका दिया जाए, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। जामिया मिलिया इस्लामिया से जुड़े एक कथित मामले पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन किसी भी शिक्षक द्वारा छात्र के साथ हिंसक या अपमानजनक व्यवहार किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने सामाजिक और शैक्षणिक व्यवस्था को संवेदनशील और मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया के इस सालाना जलसे में बड़ी संख्या में उलेमा, समाजसेवी उमर कुरैशी, अहमद नवाज , वहाब खान, शाहनवाज, अकरम खान, नदीम अहमद, काशिफ, और स्थानीय लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का माहौल धार्मिक उत्साह, अनुशासन और भाईचारे से भरा रहा।

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