चकबंदी विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप, 5 वर्षों से भूमि कब्जे के लिए भटक रहे किसान, 7 दिन में समाधान का आश्वासन
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान दिवस उस समय विवादों में घिर गया, जब वर्षों से अपनी ही जमीन पर कब्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहे दो किसानों ने आत्मदाह की अनुमति मांग ली। मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और चकबंदी विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलेक्ट्रेट स्थित चौधरी चरण सिंह सभागार में बुधवार को आयोजित किसान दिवस के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब गांव लच्छेड़ा निवासी दो किसानकृविरेंद्र कुमार और श्रीपाल कुमारकृने मंच पर पहुंचकर आत्मदाह की अनुमति की मांग कर दी। दोनों किसानों का आरोप है कि वे पिछले पांच वर्षों से चकबंदी विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपनी ही भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका है। किसानों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उनकी भूमि खाली कराई गई थी, लेकिन उसके बाद विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते उन्हें दोबारा कब्जा नहीं दिलाया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने के भी गंभीर आरोप लगाए।
किसानों के अनुसार, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा के कारण उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उनका कहना है कि अपनी ही जमीन पर कब्जा न मिलना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि अगले 7 से 15 दिनों के भीतर उन्हें भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे परिवार सहित आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। इस पूरे मामले की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रशासन संजय कुमार ने तत्काल चकबंदी अधिकारी को किसान दिवस में बुलाया। मौके पर पहुंचे अधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष नवीन राठी ने भी प्रशासन को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि जिले में किसी भी किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा, तो कोई भी अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर काम नहीं कर पाएगा। किसान दिवस में हुई इस घटना ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की नजरें प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर टिकी हैं।






