आरडीएफ को लेकर उद्योगों ने प्रशासनिक अफसरों के समक्ष दिखाई अकड़, कहा-किसान नेता के साथ हुई तीखी बहस
मुजफ्फरनगर। आरडीएफ को लेकर जनपद के उद्योग आये दिन किसान संगठनों के द्वारा किये जा रहे धरने और प्रदर्शन, फैक्ट्रियों पर दबाव की राजनीति को लेकर अब मुखर हो गये हैं। गुरूवार को हुई किसान संगठन और उद्योगपतियों की मीटिंग में जिला प्रशासन बिचौलिया बना रहा। करीब ढाई घंटे चली इस मीटिंग में उद्योग पति भी पूरे मूड में नजर आये। सभी उद्योगों के मालिक और एसोसिएशन के पदाधिकारी संकल्पित दिखे कि किसी भी नाजायज दबाव को सहन नहीं करेंगे। किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने मीटिंग में जब यह कह दिया कि आरडीएफ जलाया गया या जिले में मंगाया गया तो इसको लाने वाले वाहनों के पहियों में भाला घुसेड़ देंगे तो उद्योगपतियों ने भी दो टूक जवाब देने में परहेज नहीं किया, साफ कर दिया गया कि आरडीएफ में भाला लगा तो उद्योगों पर ताला लगा दिया जायेगा।
पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष और बिन्दल डुप्लैक्स लि. के एमडी पंकज अग्रवाल मीटिंग में पूरी तरह से दबंग नजर आये। उन्होंने साफ कर दिया कि यदि एक जनवरी से आरडीएफ को रोका गया तो जिले में एक भी उद्योग नहीं चलेगा। पेपर मिलों के साथ ही दूसरे उद्योगों को भी बंद कर दिया जायेगा, ताला लगाकार चाबियां डीएम को सौंपने को सभी उद्योग तैयार हैं। उन्होंने कहा कि दबाव और तनाव भरे माहौल में उद्योग चलाने को कोई भी तैयार नहीं है। आये दिन के धरने और प्रदर्शन के नाम पर अवैध वसूली को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उद्योग परेशान हैं। ऐसे में हम भी संघर्ष करेंगे। फैक्ट्रियों को चलाने के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का जिम्मा जिला प्रशासन का है, शासन का है। यदि कोई उद्योग नाजायज काम कर रहा है, नियमों की अनदेखी हो रही है तो कार्रवाई की जाये, हम नहीं रोंगे, लेकिन आरडीएफ स्वच्छ भारत मिशन की महत्वपूर्ण कड़ी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देश को स्वच्छ बनाने की कड़ी में चलाई जा रही एक महत्वकांक्षी योजना है। ऐसे में उद्योग माडिफाइ हुए हैं। मशीनरी लगाई गई हैं। ऑनलाइन मानीटरिंग हो रही है। यदि दबाव और तनाव का एक माहौल बनाकर में उद्योगों को सताया गया तो हम जिला छोड़ देंगे और जिला ही नहीं प्रदेश यहां तक की देश भी छोड़ने को उद्योगपति तैयार बैठे हैं। सुरक्षा और सुरक्षित माहौल देना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
पंकज अग्रवाल ने बताया कि मीटिंग में मुख्य तौर पर यह तय किया गया है कि फैक्ट्रियों के बाहर यातायात जाम की स्थिति न हो, गन्दगी के कारण फिसलन न हो इसके लिए पूर्व में ही एसोसिएशन ने उद्योगों की एक कमेटी बना दी है, जो लगातार प्रतिदिन निगरानी कर रही है। इस कमेटी में उद्योगपति ही शामिल हैं। जो समस्या उठी हैं, उनके समाधान के लिए एसोसिएशन ने प्रशासन से एक माह का समय मांगा है, उसमें बहुत कुछ ठीक करने का प्रयास किया जायेगा। प्रदूषण कम करने के लिए हम प्रशासन के सहयोग करने को पूरे तरह से तैयार हैं। इसके बाद यदि आरडीएफ के बहाने उद्योगों को निशाने बनाने, दबाव बनाने और तनाव पैदा करने का काम किया गया तो उद्योग बंद कर दिये जायेंगे, उद्योग अब किसी भी सूरत में दबाव नहीं सहेंगे।






