मुजफ्फरनगर में आरडीएफ पर तकरारः राकेश टिकैत ने धमकाया तो पंकज बोले-बंद कर देंगे उद्योग

जिला पंचायत सभाकक्ष में घंटों चली बैठक में आरडीएफ ईंधन, प्रदूषण और ग्रामीणों की समस्याओं पर हुई बिंदुवार चर्चा

किसान नेताओं और अफसरों के सामने अपनी बात पर अड़े उद्यमी, कहा-नियमानुसार ही फैक्ट्रियों में जल रहा आरडीएफ

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जनपद में फैक्ट्रियों में आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के उपयोग, दूसरे राज्यों से आ रहे गीले कूड़े को जलाने और उससे फैल रहे प्रदूषण को लेकर चल रहे विवाद में प्रशासन सक्रिय भूमिका निभाने के लिए एक बिचौलिया के रूप में सामने आ गया है। किसान नेताओं और उद्यमियों के बीच बढ़ती खींचतान को समाप्त करने के लिए पहली बार दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर वार्ता कराई गई, जिसमें समस्याओं को उठाया गया तो वहीं समाधान के रास्ते भी निकाले गये। उद्यमी अपनी बात पर अड़े नजर आये। किसान नेता राकेश टिकैत ने जब आरडीएफ न जलने देने की चेतावनी देते हुए धमकाया तो पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल भी उग्र हो गये और साफ कह दिया कि सभी उद्योग बंद कर चाबियां डीएम को सौंप देंगे, दबाव नहीं सहन करेंगे।

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आरडीएफ के नाम पर फैक्ट्रियों में दूसरे राज्यों से लाए जा रहे गीले कूड़े को जलाने और उससे हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को लेकर उद्यमियों और किसान संगठनों के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच गुरुवार को प्रशासन ने मध्यस्थता करते हुए अहम बैठक आयोजित की। कचहरी स्थित जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में आरडीएफ, प्रदूषण और किसानों व ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर पहली बार किसान नेता और उद्योगपति आमने-सामने आए।

एडीएम प्रशासन संजय सिंह के नेतृत्व में हुई इस बैठक में बिंदुवार समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उद्यमियों की ओर से पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बिन्दल पेपर मिल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल ने पक्ष रखा, जबकि किसानों, ग्रामीणों और आम जनता की आवाज बनकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत बैठक में मौजूद रहे। बैठक करीब दो घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें दोनों पक्षों के बीच आरडीएफ की परिभाषा, उसकी वैधानिक स्थिति, फैक्ट्रियों में इसके उपयोग और उससे होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर तर्क-वितर्क होते रहे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि आरडीएफ की आड़ में दूसरे राज्यों से गीला कूड़ा लाकर जलाया जा रहा है, जिससे गांवों और खेतों में प्रदूषण फैल रहा है और ग्रामीणों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

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वहीं उद्यमियों की ओर से पंकज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि जनपद में उद्योग केवल अनुमति प्राप्त आरडीएफ ईंधन का ही उपयोग कर रहे हैं और उसी के अनुरूप फैक्ट्रियों में बॉयलर व अन्य मशीनरी स्थापित की गई है। उनका कहना था कि सभी कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शासन की गाइडलाइन के तहत किए जा रहे हैं। ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी हो रही है। अधिकारियों ने दोनों पक्षों की बातें गंभीरता से सुनीं और समस्याओं के समाधान को लेकर बिंदुवार चर्चा की। बैठक में कुछ ऐसे मुद्दे भी सामने आए, जिनके निस्तारण के लिए शासन स्तर पर निर्णय आवश्यक बताया गया। इस पर दोनों पक्षों की सहमति से प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि इससे पूर्व भारतीय किसान यूनियन द्वारा जट मुजहेड़ा में फैक्ट्रियों में आरडीएफ ईंधन के विरोध में पंचायत की गई थी। उसी दौरान प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया था कि उद्यमियों के साथ बैठक कराकर समस्या का समाधान निकाला जाएगा। गुरुवार की बैठक उसी कड़ी का अहम हिस्सा मानी जा रही है। इस बीच जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने आरडीएफ के उपयोग और उससे जुड़े मामलों की निगरानी के लिए अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन पहले ही कर दिया है। समिति को फैक्ट्रियों की नियमित जांच करने और प्रत्येक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसानों, ग्रामीणों और उद्योगोंकृतीनों के हितों का संतुलन बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक को सकारात्मक पहल बताते हुए उम्मीद जताई गई कि संवाद के जरिए विवाद का स्थायी समाधान निकलेगा।

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