आलम परिवार की नई सियासी तरावटः आलम लड़ेंगे सदर सीट से चुनाव

पूर्व विधायक नवाजिश आलम ने पोस्ट की पिता की वीडियो, पूर्व सांसद आलम बोले-मेरे समर्थक लुट रहे, पिट रहे, मैं अब सक्रिय होना चाहता हूं

मुजफ्फरनगर। युवाओं को रोजगार बांटने और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर स्मारक का लोकार्पण करने यहां 13 अपै्रल के अपने दौरे के दौरान मंचीय संबोधन से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत नई विधानसभा सीट बनने का संकेत देकर सियासी सरगर्मी बढ़ाकर गये सीएम योगी के इस वाक्य को लेकर अभी सियासी चुगलियों का दौर चरम पर ही बना था कि जिले में हाशिये पर पहुंच चुकी मुस्लिम सियासत में एक नई तरावट ने हलचल मचा दी है। यहां भाजपा का एक मजबूत गढ़ माने जाने वाली मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट से पूर्व सांसद अमीर आलम खान ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर अपने समर्थकों को कमर कसने का मौका दे दिया है। उनका यह वीडियो संदेश नई राजनीतिक गर्मी के रूप में खूब वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, सभी जोड़ तोड़ की बिसात पर अपने अपने हाकिमों के सहारे अपने चाल को मजबूत बनाने में जुटे हैं। ऐसे में मुजफ्फरनगर में नई विधानसभा सीट की सनसनीखेज चर्चाओं की तपिश में अब पूर्व सांसद अमीर आलम खां की एक वीडियो ने और चिंगारी उठाने का काम किया है। आलम ने मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। वो अभी आजाद समाज पार्टी कांशीराम में हैं और सांसद चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनके दलित मुस्लिम समीकरण के सियासी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी ये साफ नहीं किया कि वो चन्द्रशेखर के दल से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे या मौका परस्ती में जो हाथ लग जाये, उसके अनुसार माहौल बनाया जायेगा। खैर, उनके इस फैसले के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जरूर तेज हो गया है और विभिन्न दलों में संभावित समीकरणों को लेकर हलचल बढ़ गई है।

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अमीर आलम खान का एक वीडियो उनके पुत्र पूर्व विधायक नवाजिलश आलम खान ने अपने फेसबुक पेज पर शुक्रवार की सुबह पोस्ट किया है। अमीर आलम ने यह वीडियो संदेश जारी कर साफ किया कि वह वर्ष 2027 में प्रस्तावित यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। अपने वीडियो संदेश में अमीर आलम खान ने मौजूदा हालात पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके समर्थकों के साथ पुलिस-प्रशासन द्वारा लगातार ज्यादतियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि चुप रहना संभव नहीं है, जिसके चलते उन्होंने सक्रिय राजनीति में लौटने और चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सदर सीट का राजनीतिक समीकरण बदल चुका है। इसका लाभ यहां धर्मनिरपेक्ष छवि वाले नेताओं के पक्ष में आने के कारण मतदाताओं की भूमिका अधिक प्रभावी हो गई है।

एसआईआर ने खत्म किया मुजफ्फरनगर सीट पर बीजेपी का वर्चस्व

पूर्व सांसद अमीर आलम खान ने अपनी वीडियो में जो कुछ संदेश दिया, वो हू ब हू, हमने यहां प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, आप भी पढ़े और सुनें…..दोस्तों और बुजुर्गों मैं इस वीडियो के माध्यम से आपको ये बताना चाहता हूं कि मैं इस बार मुजफ्फरनगर विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहता हूं, इसलिए कि जैसे मैं निष्क्रिय हूं तो मेरे अपने लोग, मेरे मिलने वाले, मेरे अपने लोग और मेरे समर्थक बहुत परेशान हैं, वो लुट भी रहे हैं और पिट भी रहे हैं। लिहाजा मैं अपने आप में इतना दम तो समझता हूं कि मैं यदि किसी पद पर हूं तो किसी की इतनी हिम्मत नहीं है कि कोई मेरे आदमियों को बेवजह पीट दे या लूट ले।

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बहुत दिन सक्रिय रहा तो लुटा ही नहीं कुछ और अब फिर से सक्रिय होना चाहता हूं, अपने लोगों के बचाव में, लोगों की खिदमत में, लोगों के काम आने के लिए मैं मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ना चाहता हूं, उम्मीद करता हूं कि हमारे सब साथी, हमारे सभी दोस्त, मिलने-चाहने वाले मुझे इसमें अपनी दुआओं से और हर तरीके के समर्थन से नवाजने का काम करेंगे। इस बार हालात ऐसे हो गये हैं, एसआईआर के बाद कि वहां से चुनाव जीतना आसान है, बीजेपी का वर्चस्व खत्म हो गया और सेकुलर छवि के लोगों का वर्चस्व शुरू होगा। जब भी मैं चुनाव लड़ता हूं, मुझे हर बिरादरी का वोट मिला है। हिंदू-मुस्लिम सभी वर्गों के मतदाताओं का भरपूर समर्थन मुझे मिलता रहा है, अवसर मिला तो सभी की खिदमत करने में कोई चूक नहीं होगी।

अमीर आलम तीन बार विधायक और दो बार रहे सांसद

अमीर आलम खां का जन्म 2 अक्टूबर 1958 को वर्तमान में जनपद शामली का हिस्सा गढ़ीपुख्ता में हुआ था। उन्होंने चौधरी चरण सिंह के राजनीतिक दल से अपना सियासी कारवां शुरू किया था। वो तीन बार विधायक और दो बार सांसद रहे। अमीर आलम खां 1985 में थानाभवन सीट से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वो 1989 में मोरना विधानसभा से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इसके बाद 1996 में उन्होंने फिर से थानाभवन सीट पर चुनाव लड़ा और जीते। 1999 में लोकसभा चुनाव आये तो अमीर आलम ने कैराना लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी किस्मत को आजमाया और वो यहां जनता का मत पाकर सांसद निर्वाचित हुए।

पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ अमीर आलम खान।

साल 2006 में उनको समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा में भेजा गया। वो अनिल अंबानी से खाली हुई सीट पर सपा प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा में पहुंचे और दूसरी बार सांसद होने का रूतबा हासिल किया। इसके बाद वो रालोद में चले गये थे। इसी बीच केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी और अजित सिंह एनडीए में शामिल हो गये थे। अमीर आलम ने भाजपा के साथ जाने पर रालोद छोड़ दी थी तथा सपा में आ गये थे। वो भारत की राजनीतिक व्यवस्था के चार सदनों में से तीन के सदस्य रहने के साथ ही यूपी सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

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रालोद, सपा, बसपा और अब आसपा, बेटे नवाजिश बने थे विधायक

अमीर आलम खां का सियासी करियर दल-बदल की भी कई कहानी अपने आप में समेटे हुए है। वो लोकदल से राजनीति शुरू कर कई बड़े मुकाम हासिल करने में सफल रहे। रालोद के बाद सपा, बसपा और अब आसपा में उनका ठिकाना है। वो लोकदल से विधायक बने, रालोद से सांसद बन लोकसभा पहुंचे और सपा से राज्यसभा की सीट मिली। इसके बाद अमीर आलम ने अपने पुत्र नवाजिश को राजनीतिक विरासत सौंपी, और सपा में पहुंचे तथा बुढ़ाना से साल 2012 में चुनाव लड़वाया, यहां नवाजिश ने रालोद के राजपाल बालियान को हराकर चुनाव जीता और विधायक बने। 2017 के चुनाव से पहले अमीर आलम ने बसपा ज्वाइन की और अपने पुत्र नवाजिश को मीरापुर विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़वाया, लेकिन कवाल कांड के प्रभाव वाले इस चुनाव में नवाजिश 39,689 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे और बीजेपी की लहर में अवतार भड़ाना चुनाव जीते। जुलाई 2017 में आलम परिवार ने बसपा को छोड़ा और जनवरी 2018 में फिर से रालोद में घर वापसी की। उनको राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। यहां टिकट की लड़ाई में विवाद होने पर वो खामोश हो गये और अब फरवरी 2025 में आलम परिवार ने चन्द्रशेखर आजाद से हाथ मिलाकर आसपा ज्वाइन की है। अब देखना है कि 2027 में यह परिवार कैसी सियासी कुश्ती लड़ता है।

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