श्री दिगंबर जैन मंदिर बाहरे जी मे दिन बुधवार को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर णमोकार महामंत्र जैन सभा (रजि.) द्वारा विधि विधान से भक्तांबर विधान का आयोजन किया गया।

विधान से पूर्व इंद्रो द्वारा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी का अभिषेक, शांतिधारा व नित्य नियम पूजा की गई। शांति धारा करने का सौभाग्य श्री ऋषभ जैन (ज्वैलर्स) , भक्तांबर विधान के मांडले के चारों ओर कलश स्थापित करने का सौभाग्य श्रीमती सविता जैन ,श्रीमती उषा जैन, श्रीमती सरिता जैन, श्रीमती सुनीता जैन, और मेन मंगल कलश स्थापित करने का सौभाग्य श्रीमती संगीता जैन (ज्वैलर्स) , अखंड दीपक को स्थापित करने का सौभाग्य श्रीमती अंजलि जैन को प्राप्त हुआ। सभा के संस्थापक अंकित जैन ने बताया कि जैन समाज के लिए अक्षय तृतीया का पावन पर्व महत्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को 6 महीने तक बिना अन्न और जल के रहने के बाद गन्ने के रस से आहार हुआ था इसलिए यह पावन पर्व जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

वही सभा के अध्यक्ष अंकित जैन ने अपने शब्दों में कहा कि इस दिन दान का भी बहुत महत्व है कुछ लोग दान देकर भी इस पावन पर्व को मनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भक्तांबर पावन विधान से, सर्व कष्ट मिट जाते हैं। तन-मन या चेतन के दुख हो, पढ़ते ही नष्ट हो जाते हैं । इस विधान में आदिप्रभु के, गुण की महिमा गाई है। अनुपम प्रभु को उपमा देकर, भक्ति ज्योति जलाई है। इसके उपरांत इस पावन पर्व पर डॉक्टर संजीव कुमार प्रत्यूष जैन ,श्री विनय कुमार विभोर जैन ,श्रीमती चंदनबाला जैन द्वारा रेलवे रोड ,भायला रोड , जनकपुरी पर प्रथम पारणा (आहार) गन्ने का रस वितरण किया गया। विधान में अजय कुमार जैन , सुरेश कुमार जैन , अनुज जैन , सिद्धांत जैन , शशि जैन पारुल जैन शिखा जैन ,सुरभि जैन,मोनिका जैन सहित समस्त जैन समाज उपस्थित रहा।

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