रिटायर्ड इंजीनियर को डिजीटल अरेस्ट कर 33.33 लाख की ठगी करने वाला एक गिरफ्तार

सीबीआई और कोर्ट अधिकारी बनकर किया था साइबर फ्रॉड, 7.97 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खातों का हुआ खुलासा

मुजफ्फरनगर। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच मुजफ्फरनगर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। एक रिटायर्ड इंजीनियर को डिजिटल अरेस्ट कर बड़ी ठगी करने वाले साइबर ठगों के गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद अब एक गिरोह के एक और सदस्य को गिरफ्तार किया गया है। जिससे पूछताछ के बाद करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की परतें खुल रही हैं।
साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने और मिशन शक्ति 5.0 के तहत चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक अपराध श्रीमती इंदू सिद्धार्थ ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान खुलासा किया कि थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने एक ऐसे शातिर साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो खुद को विभिन्न जांच एजेंसियों और न्यायालयों का अधिकारी बताकर आम नागरिकों से करोड़ों रुपये ठग चुका है।
गिरफ्तार अभियुक्त का नाम दीपक जाखड़ है, जो राजस्थान के गंगानगर जिले के सूरतगढ़ थाना क्षेत्र के सोपुरा गांव का रहने वाला है। पुलिस टीम ने इसके कब्जे से 01 मोबाइल फोन, 06 पासबुक, 07 डेबिट कार्ड, 08 चेकबुक और एक सिम कार्ड बरामद किया है। एसपी क्राइम ने बताया कि एक सेवानिवृत्त इंजीनियर की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। अभियुक्त ने पहले उन्हें ट्राई अधिकारी बनकर कॉल किया और कहा कि उनके नाम से कैनरा बैंक में एक खाता खुला है जिसमें अवैध लेन-देन हुआ है। इसके बाद पीड़ित को दिल्ली के दरियागंज थाने के नाम से बने फर्जी लोगो वाले व्हाट्सएप कॉल किए गए, जहां उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है।
इसके बाद सीबीआई और कोर्ट अधिकारी बनकर आरोपी ने उन्हें एक फर्जी प्रार्थना पत्र लिखवाया और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर फर्जी कोर्ट लेटर हेड और फाइलें भेजी गईं। भयभीत पीड़ित से कुल 33,33,000 रुपये की ठगी की गई। इस गिरोह के एक सदस्य को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। अब उसके साथी को दबोचा गया। एसपी क्राइम ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में दीपक जाखड़ ने कबूला कि उसकी मुलाकात राहुल भाधू नामक व्यक्ति से हुई थी, जिसने उसे ट्रेडिंग के बहाने फर्जी खातों की जरूरत बताई। दीपक ने खुद और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर किट राहुल को सौंप दी और प्रति खाते 12,000 से 15,000 रुपये की रकम प्राप्त की। धनराशि आने के बाद दीपक खुद एटीएम से पैसे निकालकर राहुल के बताए खातों में जमा कर देता था। इस काम में उसके साथ करन, अमित और विशाल चौधरी भी संलिप्त हैं। एसपी ने बताया कि इस अभियान में लगी महिला पुलिसकर्मियों मुख्य आरक्षी मिनाक्षी और आरक्षी अंशु द्वारा समन्वय पोर्टल पर की गई जांच में जिन पांच खातों की जानकारी सामने आई, उनमें अब तक करीब 7 करोड़ 97 लाख 33 हजार 990 रुपये की ठगी से जुड़ी 12 शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह और उनकी टीम की प्रशंसा की।

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