मुजफ्फरनगर में अटल चौक को लेकर सियासी टशन, टाउनहाल में टेंशन

मीनाक्षी चौक का नाम बदलने के ऐलान के बाद उठे विरोध के स्वर, अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद की निशानी मिटाने का लगा आरोप

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर के शहर में एक प्रमुख चौराहे के नामकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी और सामाजिक टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 101वीं जयंती के अवसर पर मीनाक्षी चौक का नाम बदलकर अटल चौक किए जाने के बाद विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। मामला अब सियासी बयानबाजी के कारण गरमाहट पकड़ता दिख रहा है। सपा के साथ ही अन्य लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जंग मं बलिदान देने वाले अमर शहीद की स्मृति से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए उसको मिटाने का विरोध किया है, तो वहीं भाजपा के लोग इसे भारत के शिखर पुरुष को सम्मान बताते हुए समर्थन कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 101वीं जयंती के अवसर पर शहर में अटल चौक और अटल मार्ग के नामकरण के लिए चलाए गए अभियान ने अब विवाद का रूप ले लिया है। मीनाक्षी चौक पर रातों-रात अटल चौक का भगवा रंग का बोर्ड लगाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। 24 दिसम्बर को नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने भाजपा पदाधिकारियों के साथ इसका ऐलान किया और स्वच्छता श्रमदान किया गया था।
इस कदम के विरोध में सबसे पहले समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सामने आए हैं। जिलाध्यक्ष जिया चौधरी सहित अन्य नेताओं ने मुखर विरोध किया है। उनका कहना है कि बिना किसी सार्वजनिक घोषणा और नगरपालिका बोर्ड की विधिवत स्वीकृति के चौराहे का नाम बदलना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। विरोध करने वालों का आरोप है कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया और स्थानीय लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया। विवाद यहीं नहीं थमा। कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने दावा किया कि मीनाक्षी चौक का नामकरण अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता सैनिक वीर अब्दुल हमीद के बलिदान की स्मृति से जुड़ा रहा है। उनका कहना है कि चौराहे की पहचान को बदलना शहीद की निशानी मिटाने जैसा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले के तूल पकड़ने के बाद नगरपालिका प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। टाउनहाल में इस मुद्दे पर नई हलचल का दौर चला, जहां माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। अब नगर पालिका प्रशासन पुराने रिकॉर्ड, प्रस्ताव और ऐतिहासिक दस्तावेज खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि चौराहे का वास्तविक नामकरण कब और किस आधार पर हुआ था। नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में कानूनी और ऐतिहासिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए विधिवत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। फिलहाल, अटल चौक और मीनाक्षी चौक के नाम को लेकर जारी यह विवाद शहर की राजनीति में नई गर्माहट ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन किस निष्कर्ष पर पहुंचता है और क्या यह विवाद किसी सर्वसम्मति के समाधान तक पहुंच पाता है या फिर सियासी टकराव और गहराता है।

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1971 से मीनाक्षी चौक, 1996 में वीर अब्दुल हमीद का नाम
मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् के अधीन आने वाला मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र वाला मीनाक्षी चौक अचानक ही सियासी सनसनी का कारण बन गया है। इस चौराहे का राजनीतिक में बड़ा गहरा असर रहा है। हमेशा ही पक्ष और विपक्ष के सियासी अखाड़े में यह चौराहा अपनी मौजूदगी साबित करता रहा है। नसबंदी कांड़, 1992 का मंदिर आंदोलन दंगा, साल 2013 का साम्प्रदायिक दंगा और इसके बाद यूपी में सत्ता परिवर्तन के बाद यह चौराहा नेताओं के बयानों का मुख्य आधार रहा।

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दक्षिण के मीनाक्षी मंदिर की देवी के नाम पर थियेटर की स्थापना
सूत्रों का दावा है कि इस चौराहे कभी कोई भी नामकरण नहीं हुआ। यहां पर मीनाक्षी थियेटर बना तो लोग इसे मीनाक्षी चौराहा कहने लगे और यह पहचान बन गया। मीनाक्षी थियेटर के मालिक समर्थ प्रकाश का कहना है कि करीब 54 साल पूर्व साल 1971 में हमारे परिवार ने मीनाक्षी थियेटर की स्थापना की। इसका नाम दक्षिण के मीनाक्षी मंदिर की देवी मीनाक्षी (पार्वती) जी के नाम पर रखा था, इसके लिए कोई अधिकृत प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी, थियेटर बना तो चौराहा भी मीनाक्षी हो गया था। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब सुना है ये अटल चौक कर दिया गया है। इससे पहले भी चौराहे का नाम बदला गया। करीब 35 साल पहले बंद हुए शहर के प्रकाश सिनेमा के नाम से प्रकाश चौक का नाम पड़ा था, लेकिन इसे पूर्व में लाला लाजपत राय चौक कर दिया गया, परंतु जनता ने इसे नकारा और आज भी इस क्षेत्र को लोग प्रकाश चौक ही कहते हैं। वहीं सपा नेता साजिद हसन का दावा है कि साल 1996 में पालिका बोर्ड में इस चौराहे का नाम वीर अब्दुल हमीद करने का प्रस्ताव पारित हुआ था।
जनवरी की बोर्ड बैठक में अटल चौक प्रस्ताव लाएंगेः मीनाक्षी स्वरूप
मुजफ्फरनगर नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने अटल चौक को लेकर हो रहे विवाद पर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का राष्ट्रहित के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। वो राष्ट्र के शिखर पुरुष रहे और भारत रत्न हैं। पालिका ने उनके जीवन आदर्श से युवाओं को प्रेरणा देने और उनके संघर्ष को चिरस्थायित्व देने के लिए मीनाक्षी चौक का नामकरण अटल चौक किया है। इसके लिए जनवरी में संभावित पालिका बोर्ड की मीटिंग में प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। जहां तक अमर शहीद वीर अब्दुल हमीद की स्मृतियों से छेड़छाड़ का सवाल है तो मीनाक्षी चौक का नामकरण कभी भी अधिकृत रूप से नहीं हुआ है। हम अमर शहीद सैनिकों का पूर्ण सम्मान करते है, उनकी स्मृति में भी पालिका शहर में विशेष स्थान चिन्हित करने का प्रयास करेगी।

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मीनाक्षी चौक से जुड़े इतिहास के अभिलेखों की करा रहे तलाशः ईओ प्रज्ञा
पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि मीनाक्षी चौक से जुड़े इतिहास और नामकरण को लेकर पालिका प्रशासन पुराने अभिलेख और बोर्ड प्रस्ताव को तलाशने के लिए जुटा हुआ है। पालिका के सम्पत्ति विभाग से इसके लिए अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। अभी तक यही जानकारी में आया है कि मीनाक्षी चौक का कभी भी कोई नामकरण अधिकृत रूप से नहीं किया गया है। मीनाक्षी चौक नाम भी आम बोलचाल में ही पड़ा और यह तभी से प्रचलित है। इसके बाद वीर अब्दुल हमीद चौराहा करने की मांग उठी और पिछले कुछ समय से इस चौराहे का नाम महर्षि वाल्मीकि को समर्पित करने की भी मांग होती रही है। बोर्ड प्रस्ताव लाने की तैयारी है, इससे पहले इसके इतिहास को टटोला जा रहा है।

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