लखनऊ। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, मैं भी नहीं।”
सीएम योगी ने कहा कि भारत के सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। देश के चारों दिशाओं में स्थापित चार पीठों – उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका – की अपनी परंपरा और मर्यादा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना परंपरा के शंकराचार्य लिखने और माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि संबंधित व्यक्ति शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उनके खिलाफ लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज की गई थी?
योगी आदित्यनाथ ने मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में आई करीब साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई थी। ऐसे समय में रास्ता ब्लॉक करना किसी जिम्मेदार व्यक्ति का आचरण नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है। मेरे लिए भी वही कानून है जो आम नागरिक के लिए है। भारत के हर व्यक्ति को कानून का पालन करना चाहिए।”
सीएम ने विपक्ष पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि व्यवस्था और परंपरा का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष किसी को पूजना चाहता है तो करे, लेकिन सरकार कानून के शासन में विश्वास रखती है और उसका पालन करवाना भी जानती है।






