दुल्हेंडी 4 मार्च को मनाई जाएगी। होली के अगले दिन पारंपरिक रूप से मनाए जाने वाले दुल्हेंडी पर्व की तिथि इस वर्ष चंद्र ग्रहण के कारण बदल दी गई है। संत पंडित विष्णु कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि होली और दुल्हेंडी के बीच पड़ रहे चंद्र ग्रहण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। खतौली में इस बार होली और दुल्हेंडी के बीच चंद्र ग्रहण का संयोग बना है। नगर में यह पहला अवसर बताया जा रहा है जब इस प्रकार का खगोलीय संयोग सामने आया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
इसी कारण कई स्थानों पर दुल्हेंडी के कार्यक्रम को स्थगित कर नई तिथि निर्धारित की गई है। गांव पुरा स्थित मंदिर के संत पंडित विष्णु कुमार ने बताया कि चंद्र ग्रहण का प्रभाव धार्मिक परंपराओं पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि ग्रहण काल में पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य और उत्सव मनाने से परहेज किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धि स्नान कर ही सामान्य गतिविधियां प्रारंभ की जाती हैं। इस बार ग्रहण का समय होली के उत्सव के तुरंत बाद पड़ रहा है, इसलिए दुल्हेंडी जैसे उत्सव को अगले शुभ दिन पर मनाना अधिक उचित माना गया है। पंडित विष्णु कुमार के अनुसार, सनातन परंपरा में ग्रहण को विशेष खगोलीय घटना माना जाता है, जिसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है। ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना फलदायी बताया गया है।
नगर प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दुल्हेंडी 4 मार्च को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। रंग-गुलाल खेलने वाले युवाओं और बच्चों में तिथि परिवर्तन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, हालांकि अधिकांश लोग धार्मिक आस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुल मिलाकर इस वर्ष होली का पर्व खगोलीय संयोग के कारण विशेष बन गया है और दुल्हेंडी 4 मार्च को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाएगी।






