समाज में नफरत का जहर घोल रहे स्वामी यशवीरः मांगेराम त्यागी

आयुष मलिक प्रकरण में समाज और परिवार की भूमिका बताई प्रमुख, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय भूमिहार त्यागी-ब्राहमण समाज समिति के अध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने आयुष मलिक प्रकरण को लेकर मुखर बयानबाजी कर रहे योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर द्वारा दिए गए बयानों और उनकी कार्यशैली की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी यशवीर समाज में हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, जो सामाजिक सौहार्द और देशहित के लिए उचित नहीं है। उनके लगातार बयान समाज में नफरत का जहर घोलने का काम कर रहे हैं और मैं उनके ऐसे बयानों की घोर निंदा करता हूं। आयुष मलिक प्रकरण में जो किया, उसके परिजनों ओर समाज ने किया है, पिता तहरीर न देते तो कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाती।

सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए मांगेराम त्यागी ने कहा कि आयुष मलिक प्रकरण में न्याय की मांग सबसे पहले उसके परिवार और समाज की ओर से उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को तहरीर न दी जाती तो मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई संभव नहीं थी। ऐसे में इस प्रकरण का श्रेय किसी एक व्यक्ति को देना उचित नहीं है। स्वामी यशवीर तो राजनीतिक महत्वकांक्षा से घिरे हुए व्यक्ति हैं और वो लाइम लाइट में रहने के लिए ही इस तरह की गैर सामाजिक बयानबाजी कर माहौल को खराब करने का प्रयास करते रहते हैं।

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मांगेराम त्यागी ने विशेष रूप से स्वामी यशवीर के उस बयान की निंदा की, जिसमें मुस्लिम चिकित्सकों पर हिंदू युवाओं के विरुद्ध साजिश के तहत कार्य करने का आरोप लगाया गया था। स्वामी यशवीर ने कहा है कि मुस्लिम डॉक्टर जानबूझकर हिंदू युवकों को उपचार के बहान नपुंसक बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय के कुछ व्यक्तियों की गलतियों के आधार पर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे सामाजिक तनाव भी बढ़ता है। दो-चार प्रतिशत लोग सभी धर्म और समुदाय में खराब हो सकते हैं, पूरा धर्म या सम्प्रदाय खराब नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पंत हॉस्पिटल दिल्ली में हार्ट स्पेशलिस्ट एक मुस्लिम है और न जोन कितने लोगों की जान बचाई है।

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उन्होंने कहा कि देश के निर्माण और विकास में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का योगदान रहा है। निर्माण कार्यों से लेकर विभिन्न व्यवसायों और चिकित्सा सेवाओं तक, समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनकी पहचान उनके कार्यों से होती है, न कि केवल उनके धर्म से। उन्होंने देश के लिए जीवन दिया है, ऐसे में पूरा देश उनका सम्मान करता है, जबकि वो एक मुसलमान थे।
मांगेराम त्यागी ने आरोप लगाया कि स्वामी यशवीर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। उनको चरथावल विधानसभा सीट से आगामी चुनाव लड़ना है, ऐसे में वो माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने और विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय लगातार हिंदू-मुस्लिम विवादों को हवा देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और आम जनता के मुद्दों पर अपेक्षित आवाज उठाने के बजाय धार्मिक ध्रुवीकरण का माहौल बनाया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि हर धर्म और समुदाय में कुछ प्रतिशत लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन उनके आधार पर पूरे समाज को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। उनके अनुसार, दुष्ट व्यक्ति का मूल्यांकन उसके कर्मों से होना चाहिए, न कि उसकी धार्मिक पहचान से। त्यागी ने सभी वर्गों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि दंगों और सामाजिक तनाव का सबसे अधिक नुकसान गरीब, मजदूर और आम परिवारों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने के बजाय एकता, सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय देश और समाज के अभिन्न अंग हैं तथा सभी को मिलकर सामाजिक समरसता को मजबूत करना चाहिए।

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