बिहार में बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच नीतीश कुमार इस्तीफा विधान परिषद से दे चुके हैं, लेकिन फिलहाल वह मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। उनके इस फैसले के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नीतीश कुमार को संवैधानिक नियमों के तहत 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी थी, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
बिहार विधान परिषद में नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसकी पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार, जदयू के विधान परिषद सदस्य संजय कुमार सिंह गांधी ने मुख्यमंत्री का त्यागपत्र सभापति को सौंपा। हालांकि नीतीश कुमार इस्तीफा विधान परिषद देने के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर कायम रहेंगे। इसको लेकर सरकार के मंत्रियों ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार जैसे नेता देश को मिलना मुश्किल है। वहीं मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस्तीफा दिया गया है। नीतीश कुमार 16 मार्च, 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। संविधान के अनुसार, उन्हें 14 दिन के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी थी। इसी नियम के तहत उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लंबा और महत्वपूर्ण रहा है। 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बने, 1989 में लोकसभा के लिए चुने गए, अब पहली बार राज्यसभा में पहुंचे हैं वह उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जो चारों सदनों के सदस्य रहे हैं। नीतीश कुमार इस्तीफा विधान परिषद के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
हालांकि अभी तक किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस बीच, मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की इच्छा अलग हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री अपने निर्णय पर कायम हैं। जद(यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पहले ही स्पष्ट किया था कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार 14 दिन के भीतर इस्तीफा देना जरूरी होता है और उसी के तहत कार्रवाई की गई है।
नीतीश कुमार इस्तीफा विधान परिषद एक संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे बिहार की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री पद पर उनकी मौजूदगी बरकरार है, जबकि भविष्य को लेकर सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।






