सीएम योगी से मिले धर्मेन्द्र ने की मांगः यूपी में शुरू हो मुख्यमंत्री ग्रामीण बायोगैस मिशन

भाकियू (अराजनैतिक) के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखा मॉडल, गोबर आधारित ऊर्जा मॉडल को प्रदेश स्तर पर लागू करने का दिया सुझाव

मुजफ्फरनगर। सोमवार को यहां नुमाइश मैदान में आयोजित रोजगार मेले के दौरान किसानों द्वारा विकसित किए गए नवाचारों ने एक बार फिर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में नई बहस को जन्म दिया है। इस अवसर पर गोबर आधारित बायोगैस मॉडल को लेकर उठाई गई मांग ने प्रदेश में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार की संभावनाओं को और मजबूत किया है।

जनपद में आयोजित नुमाइश मैदान स्थित रोजगार मेले में उस समय विशेष चर्चा देखने को मिली जब भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री से गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन को राज्य स्तर पर बढ़ावा देने की मांग की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स का निरीक्षण किया और किसानों द्वारा विकसित बायोगैस मॉडल की सराहना की। मंचीय संबोधन में भी मुख्यमंत्री ने किसान के इस नवाचार और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख किया।

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इस अवसर पर धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री को सुझाव देते हुए कहा कि प्रदेश में “मुख्यमंत्री ग्रामीण बायोगैस मिशन” की शुरुआत की जाए, जिससे गांव स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण घरेलू ऊर्जा संसाधनों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में ग्रामीण भारत का किसान स्वयं समाधान प्रस्तुत कर रहा है।

धर्मेन्द्र मलिक ने जानकारी दी कि जनपद मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से 300 से अधिक बायोगैस प्लांट सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इन प्लांटों से किसानों को न केवल ऊर्जा प्राप्त हो रही है बल्कि आर्थिक मजबूती भी मिल रही है। उनके अनुसार एक बायोगैस प्लांट से किसान को प्रतिवर्ष लगभग 27,600 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। इसमें घरेलू गैस की बचत और जैविक खाद दोनों शामिल हैं। इससे प्रति माह 22दृ24 किलोग्राम गैस उत्पादन, लगभग 1.5 एलपीजी सिलेंडर के बराबर गैस उपलब्ध, मासिक बचत लगभग 1,300 रुपये प्रति सिलेंडर के हिसाब से, वार्षिक गैस बचत लगभग 15,600 रुपये, प्रतिदिन 40दृ50 किलोग्राम जैविक खाद उत्पादन, जैविक खाद से लगभग 12,000 रुपये वार्षिक लाभ और इस प्रकार कुल वार्षिक लाभ लगभग 27,600 रुपये बताया गया है।

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किसान नेता श्री मलिक ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुजफ्फरनगर क्षेत्र में गन्ना, धान, गेहूं के अवशेष, प्रेसमड और पशुधन की पर्याप्त उपलब्धता है, जिससे बायोगैस उत्पादन की अपार संभावनाएं बनती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मॉडल को नीति स्तर पर लागू किया जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में करोड़ों रुपये की नई संरचना तैयार कर सकता है। धर्मेन्द्र मलिक ने मुख्यमंत्री से के समक्ष सुझाव रखते हुए कहा कि प्रदेश में “मुख्यमंत्री ग्रामीण बायोगैस मिशन” शुरू किया जाए, गांव स्तर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए और बायोगैस मॉडल को कृषि योजनाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

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