किताब विक्रेताओं के विरोध के बीच पुस्तक लेने पहुंचे छात्र एवं छात्राओं को घंटों तक धूप में खड़ा रहना पड़ा, पुलिस ने पहुंचकर मामला कराया शांत
मुजफ्फरनगर। एनसीईआरटी की पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगाए गए स्टॉल डीएवी इंटर कॉलेज में विवाद का कारण बन गए। सीमित विक्रेताओं को अनुमति दिए जाने के आरोपों के चलते मामला इतना बढ़ा कि हंगामे के बाद पूरे कार्यक्रम को निरस्त करना पड़ा। शहर के आर्य समाज रोड स्थित डीएवी इंटर कॉलेज परिसर में एनसीईआरटी की किताबों के वितरण और बिक्री के लिए लगाए गए स्टॉल उस समय विवाद का केंद्र बन गए, जब स्थानीय किताब विक्रेताओं ने मौके पर पहुंचकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। आरोप लगाया गया कि कॉलेज प्रशासन ने केवल कुछ चुनिंदा दुकानदारों को ही स्टॉल लगाने की अनुमति दी, जिससे अन्य विक्रेताओं में नाराजगी फैल गई।
हंगामे के दौरान कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस बीच सैकड़ों छात्र-छात्राएं धूप में लंबी कतारों में खड़े होकर किताबें लेने का इंतजार करते रहे। बढ़ते विवाद और अव्यवस्था के कारण छात्रों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर बुलाया गया। सिविल लाइन पुलिस ने पहुंचकर हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान नाराज दुकानदारों ने प्रधानाचार्य का घेराव कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। विरोध इतना बढ़ गया कि अंततः कॉलेज प्रशासन को एनसीईआरटी पुस्तकों के स्टॉल हटवाने पड़े और पूरे कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।
विरोध कर रहे दुकानदारों का कहना था कि केवल एक या दो अधिकृत विक्रेताओं को ही बुलाया गया, जबकि अन्य दुकानदारों को मौका नहीं दिया गया। उनका यह भी आरोप था कि छात्रों पर इन्हीं स्टॉल से किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो रही थी और छात्रों को विकल्प नहीं मिल पा रहा था। कॉलेज प्रशासन की ओर से बताया गया कि माध्यमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक के पत्र के आधार पर यह व्यवस्था की गई थी।
शासन स्तर से निर्देशित किया गया था कि छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत विक्रेता के माध्यम से कॉलेजों में स्टॉल लगाए जाएं। इसी क्रम में एक अधिकृत बुक डिपो द्वारा कॉलेज में स्टॉल लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने शिकायत दी थी कि केवल विशेष दुकानदारों को अनुमति दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ा और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। कार्यक्रम रद्द होने के बाद सभी छात्र-छात्राएं और संबंधित लोग मौके से चले गए। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।






