उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 29 अप्रैल को हरदोई में प्रस्तावित है। इसको लेकर तैयारियां तेज हैं। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया गया है, जिससे मेरठ से प्रयागराज के बीच यात्रा पहले के मुकाबले काफी तेज होने की उम्मीद है। हालिया रिपोर्टों में यह अनुमान भी जताया गया है कि यह सफर करीब 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा।
अभी तक मेरठ से प्रयागराज का सफर लंबा और समय लेने वाला माना जाता है। इसी वजह से इस एक्सप्रेसवे को सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले बड़े कनेक्टिविटी कॉरिडोर के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
6 लेन का एक्सप्रेसवे, आगे 8 लेन तक बढ़ाने की गुंजाइश
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी, यानी यूपीडा, के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे को 6 लेन में विकसित किया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। परियोजना की कुल लंबाई करीब 594 किलोमीटर है, जबकि इसका राइट ऑफ वे 120 मीटर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस चौड़ाई और डिजाइन से ट्रैफिक का दबाव संभालने और सुरक्षित आवागमन में मदद मिलेगी।
इस परियोजना को चार समूहों में बांटकर विकसित किया गया, ताकि निर्माण काम चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके। अधिकारियों के अनुसार इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और गुणवत्ता मानकों का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि इसे राज्य की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जा रहा है।
टोल, जन-सुविधाएं और एयरस्ट्रिप इसकी बड़ी खासियत
गंगा एक्सप्रेसवे पर दो मुख्य टोल प्लाजा मेरठ और प्रयागराज में बनाए गए हैं। इसके अलावा 19 रैम्प टोल प्लाजा भी बनाए गए हैं, ताकि अलग-अलग इंटरचेंज से आने-जाने वाले वाहनों को एंट्री और एग्जिट में आसानी हो। यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए रास्ते में 9 जन-सुविधा परिसर भी विकसित किए गए हैं, जहां ईंधन, खानपान, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
परियोजना में गंगा नदी पर करीब 960 मीटर लंबा और रामगंगा नदी पर करीब 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। वहीं शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी तैयार की गई है, जो इस एक्सप्रेसवे की सबसे चर्चित विशेषताओं में शामिल है। इस पट्टी पर इमरजेंसी लैंडिंग का सफल परीक्षण भी हो चुका है।
किसानों, उद्योग और पर्यटन को कैसे मिलेगा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इलाकों और पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के बीच तेज संपर्क बनने की उम्मीद है। इससे किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। दूसरी ओर उद्योगों को कच्चा माल और तैयार सामान ढोने में समय और लागत दोनों में राहत मिल सकती है।
इस परियोजना से धार्मिक और ऐतिहासिक शहरों तक पहुंच भी आसान होने की संभावना है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और रोजगार के नए मौके भी बनेंगे। आसान शब्दों में कहें तो यह एक्सप्रेसवे सिर्फ दूरी घटाने वाली सड़क नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेज करने वाली बड़ी बुनियादी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।






