MUZAFFARNAGAR-नगरपालिका ने की टैक्स बढ़ाने की तैयारी

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के द्वारा नए साल में शहर की जनता के साथ ही नव विस्तारित क्षेत्र के रहवासियों को टैक्स बढ़ोतरी की सौगात दिये जाने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए पालिका के कर विभाग के द्वारा शासनादेश के अनुसार तैयार की गई नियमावली को चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप द्वारा हरी झंड़ी प्रदान करते हुए टैक्स बढ़ोतरी का प्रस्ताव पालिका बोर्ड की बैठक में लाया जा रहा है। इस प्रस्ताव में 15 फीसदी तक गृह और जल कर में बढ़ोतरी करने के साथ ही रिक्त भू-खंड ;खाली प्लॉटद्ध पर भी टैक्स लगाये जाने की तैयार है। इसके साथ ही नव विस्तारित क्षेत्र में भी अब पालिका नये नियमों के अधीन ही टैक्स लगाने को कमर कस चुकी है। अंतिम फैसला बोर्ड बैठक में होना है, क्योंकि पूर्व में भी टैक्स बढ़ाने का प्रयास किया गय, लेकिन भारी जनविरोध के कारण अंजू अग्रवाल के बोर्ड को यह निर्णय वापस लेना पड़ा था।

नगरपालिका परिषद् की साल 2025 की पहली बैठक 30 जनवरी को पूर्वान्ह 11 बजे होने जा रही है। इसके लिए कुल 77 प्रस्ताव वाला एजेंडा पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह के द्वारा जारी कर दिया गया है। इसी एजेंडे में कर विभाग के द्वारा शामिल प्रस्ताव संख्या 429 में शहरी क्षेत्र में सभी आवासीय और अनावासीय भवनों के साथ ही रिक्त भू-खंड पर भी नये सिरे से कर निर्धारण करते हुए बोर्ड की स्वीकृति मांगी गई है। पालिका ने टैक्स बढ़ोतरी के लिए नया शासनादेश बताया है। कहा गया कि नगरीय निकायों में स्थित अचल संपत्तियों पर करारोपण के लिए 20 दिसम्बर 2024 को नया शासनादेश जारी किया गया है। इसी के अनुपालन के लिए प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग उत्तर प्रदेश के द्वारा सभी निकायों में भवन और भूमि पर वार्षिक मूल्य पर कर आरोपण के लिए नियमावली प्रख्यापित की गई है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि नियमावली के प्रकाशन के छह माह के भीतर सभी निकायों में संपत्तियों का मूल्यांकन और कर निर्धारण अनिवार्य रूप से कर लिया जाये।

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इसी शासनादेश के आधार पर अब नगरपालिका परिषद् ने शहरी क्षेत्र के सभी 55 वार्डों में स्थित समस्त अचल सम्पत्तियों पर नये सिरे से वार्षिक मूल्यांकन तय करते हुए नया टैक्स लगाने की तैयारी की है। इसमें अभी तक शामिल नहीं रहने वाले रिक्त भू-खंडों को भी अब टैक्स के दायरे में लाया गया है। साथ ही सीमा विस्तार के कारण पालिका क्षेत्र में आये नये क्षेत्रों में आवासीय और अनावासीय भवनों, खाली प्लॉट पर भी टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया है। पालिका के कर विभाग द्वारा करीब 15 प्रतिशत तक टैक्स बढ़ोतरी की सिफारिश अपने प्रस्ताव में की है, जिसे चेयरपर्सन ने अपने सहमति देते हुए बोर्ड के समक्ष स्वीकृति के लिए लाने के निर्देश दिये। 30 जनवरी को होने जा रही बोर्ड बैठक में इस पर विचार किया जायेगा। यदि सहमति बनी तो इसको लागू किया जायेगा।

पालिका के कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार यादव ने बताया कि विभागीय स्तर पर नगरीय क्षेत्र में स्थित अचल सम्पत्तियों पर नया कर निर्धारण करने के लिए प्रस्ताव दिया गया है, जो बोर्ड बैठक में आ रहा है। इसमें 10 से 15 फीसदी तक कर बढ़ाये जाने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि पालिका की आय को भी बढ़ाया जा सके। उनका कहना है कि साल 2016 से शहरी क्षेत्र में सम्पत्तियों पर टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। नौ साल के बाद अब पालिका यह कदम उठाने जा रही है। प्रस्ताव यदि पारित होता है तो इसके बाद टैक्स निर्धारिण के लिए आपत्तियां आमंत्रित की जायेंगी और उनका निस्तारण करने के बाद इसका फाइनल गजट कराया जायेगा, जिसके बाद नया टैक्स लागू होगा।

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2018 में तय स्वःकर निर्धारण प्रणाली की दरें आज तक लागू नहीं

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में शासन की मंशा के अनुसार ही साल 2018 में स्वःकर निर्धारण प्रणाली को अपनाते हुए नये सिरे से सम्पत्तियों का वार्षिक मूल्यांकन करने और उसके आधार पर टैक्स लगाये जाने के लिए दरें तय की गई थी। इसके लिए उपविधि-2018 लागू की गई थी। इसमें सितम्बर 2019 को पालिका बोर्ड ने इस पर सहमति दी तो इसका गजट प्रकाशन कराया गया और नये टैक्स दर पर भवन स्वामियों को बिल जारी किये गये तो बढ़े हुए टैक्स के चलते शहर में आंदोलन छिड़ गया था। इसके बाद इसको टाल दिया गया और बिल पालिका की कर निर्धारण नियमावली-2010 के आधार पर ही जारी किये जाने लगे। अंजू अग्रवाल के बोर्ड में भी इसको लागू करते हुए बिल जारी किये गये तो फिर से भारी हंगामा हुआ और संगठनों ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी। विरोध और आक्रोश को देखते हुए नवम्बर 2020 में हुई पालिका बोर्ड मीटिंग में उपविधि 2018 को स्थगित रखते हुए पुरानी व्यवस्था पर ही यह बिल जारी करने का निर्णय लिया था। अब फिर से पालिका में अचल सम्पत्तियों पर टैक्स बढ़ाने का फैसला पालिका करने जा रही है। ऐसे में विरोध की संभावना भी प्रबल हो रही है। कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार का कहना है कि शासनादेश के अनुसार हर दो साल में वार्षिक मूल्यांकन के आधार पर टैक्स रिवाइज करने का अधिकार पालिका को है, लेकिन यहां पर पिछले नौ साल से टैक्स की दरों में कोई भी बढ़ातरी नहीं की गई है।

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पांच श्रेणियों में बांटकर किया गया नये टैक्स का प्रावधान

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् के कर विभाग के द्वारा जो प्रस्ताव तैयार कर अचल सम्पत्तियों पर नया टैक्स लागू करने के लिए सम्पत्त्यिों के वार्षिक् मूल्यांकन की दरों को तय किया गया है, उनमें शहरी क्षेत्र को पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें शहर में शामिल हुए नव विस्तारित क्षेत्र को अलग श्रेणी में रखा गया है। चार श्रेणियों में शहरी क्षेत्र के मौहल्लों-कालोनियों में स्थित आवासीय भवनों पर स्वःकर निर्धारण के लिए मासिक किराया प्रस्तावित किया है। जबकि पांचवीं श्रेणी में शहरी क्षेत्र के अनावासीय भवन और भूमि को शामिल किया गया है। चार श्रेणी में आवासीय भवनों पर जहां सम्पत्तियों का मासिक किराया 50 पैसे से लेकर 3.50 रुपये प्रति वर्गफुट प्रस्तावित किया गया है। इसमें चौथी श्रेणी में शामिल नव विस्तारित क्षेत्र के रूप में शहर में शामिल वहलना, मीरापुर, मन्धेडा, खान्जापुर, शाहबुदीनपुर, कूकडा, सरवट, सहावली, बीबीपुर, अलमासपुर आदि में अब सम्पत्तियों पर टैक्स लागू किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में रिक्त भू-खंडों के लिए भी पालिका अब 20 से 70 पैसे वर्गफुट मासिक किराया के आधार पर टैक्स वसूलने का काम करेगी। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र के अनावासीय भवनों को पालिका के कर विभाग ने चार श्रेणियों में विभाजित करते हुए उन पर मासिक किराया दर आवासीय भवनों की दरों के तीन गुणा तक प्रस्तावित की हैं। 

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