मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में सरकारी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा खरीदी गई हजारों सरकारी दवाइयां कूड़े के ढेर पर पड़ी मिलीं। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
मुजफ्फरनगर में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाइयों की कमी बताकर बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर लाखों रुपये कीमत की सरकारी दवाइयां गंग नहर पटरी के किनारे कूड़े में फेंकी मिलीं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारियों ने आनन-फानन में दवाइयों को मौके से हटवाते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए। खतौली क्षेत्र में गंग नहर की पटरी पर सड़क किनारे एक बड़े खंभे के पास भारी मात्रा में सरकारी दवाइयां पड़ी मिलीं। इन दवाइयों पर साफ तौर पर नॉट फॉर सेल लिखा हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार मौके पर लगभग एक हजार से अधिक दवाइयों के पैकेट और शीशियां बिखरी पड़ी थीं।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे जिले में चर्चा शुरू हो गई और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। स्थानीय निवासी राजू सैनी भागीरथी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर पूरी दवाइयां नहीं दी जातीं। कई बार डॉक्टर मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने के लिए लिख देते हैं, जबकि अस्पताल से केवल कुछ दवाइयां देकर मरीजों को वापस भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब अस्पतालों में दवाइयों की कमी बताई जाती है, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां गंग नहर के किनारे कैसे पहुंच गईं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार जनता को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण जरूरतमंद मरीजों तक दवाइयां नहीं पहुंच पा रहीं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आए और तत्काल टीम को मौके पर भेजा गया। टीम ने कूड़े में पड़ी सभी दवाइयों को हटवाकर अपने कब्जे में ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुनील तेवतिया तक सूचना पहुंची, जिसके बाद जांच टीम गठित कर दी गई।
साथ ही संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) प्रभारी से भी रिपोर्ट तलब की गई है। सीएमओ ने बताया कि सीएचसी खतौली के प्रभारी डॉ. विनीत कुमार से इस सम्बंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सभी बरामद दवाईयों के बैच नम्बर सुरक्षित करने और इनमें एक्सपायरी दवाइयों को अलग करने के लिए कहा गया है। काफी मात्रा में एक्सपायरी दवाईयां भी इसमें शामिल हैं, प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर ये दवाइयां किस सरकारी स्वास्थ्य केंद्र को आपूर्ति की गई थीं और इन्हें कूड़े में किसने फेंका। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसीएमओ स्तर के अधिकारी को जांच दी गई है। जल्द ही सारी जानकारी प्राप्त कर कार्रवाई की जायेगी।






