अफसरशाही के आगे मंत्री बेबस, जनता के सवालों के बीच घिरे कपिल देव

जनता का सवाल-जब अपनी सरकार में कद्दावर मंत्री ही अफसरों की धींगामुश्ती के आगे लाचार हैं तो समाधान कौन करेगा?

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में इन दिनों अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर नई बहस छिड़ गई है। नगर विधायक एवं प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल लगातार सरेआम सड़क पर रहकर अधिकारियों के सामने जनता की समस्याओं को उठाते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके हर प्रयास निरर्थक ही नजर आते हैं। बिजली संकट से लेकर अधूरे विकास कार्य और सीलिंग अभियान तक, कई मामलों में मंत्री को सार्वजनिक रूप से अधिकारियों से काम कराने की अपील करनी पड़ रही है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि सरकार में प्रभावशाली माने जाने वाले मंत्री भी यदि अफसरशाही के सामने इतने बेबस नजर आ रहे हैं तो आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद किससे करे।

मुजफ्फरनगर के नगर विधायक एवं प्रदेश सरकार में कौशल विकास विभाग के स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल इन दिनों प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असहज स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले कपिल देव अग्रवाल लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं और पिछले करीब नौ वर्षों से मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण मामलों में अधिकारियों के रवैये के कारण उन्हें जनता के बीच जवाबदेही निभाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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हाल के दिनों में मंत्री कपिल देव के कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे अधिकारियों से विकास कार्यों में तेजी लाने और जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा को जन्म दे दिया है। सबसे चर्चित मामला बिलासपुर कट का रहा, जहां सरकार में एक बड़े मंत्री होने के बावजूद भी कपिल देव को स्थानीय लोगों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखनी पड़ी। मंत्री होने के बावजूद उन्हें जनता के प्रतिनिधि के बजाय एक फरियादी की भूमिका में देखा गया। इस घटनाक्रम ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

इसी प्रकार श्रीराम कॉलेज के सामने प्रस्तावित परिक्रमा मार्ग निर्माण भी लंबे समय से अटका हुआ है। नगर पालिका परिषद की ओर से करीब पांच करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने के बावजूद जल निगम की ओर से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। पिछले सप्ताह मंत्री कपिल देव स्वयं अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और जल निगम के अधिकारियों से जल्द निर्माण शुरू कराने का आग्रह किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा रही है और उनकी छवि प्रभावित हो रही है। उनकी जवाबदेही मांगी जा रही है, वो जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

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राजनीतिक दृष्टि से कपिल देव अग्रवाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंद नेताओं में माना जाता है। 13 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में आयोजित मुख्यमंत्री की जनसभा में मंच से सीएम योगी द्वारा कई बार उनका नाम लेकर उनकी सराहना की गई थी। इसके बाद भी वे मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, बैठकों और धार्मिक आयोजनों में लगातार दिखाई देते रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास 5, कालीदास मार्ग पर भी उनकी कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हो चुकी हैं, जिनमें विकास कार्यों पर चर्चा होने का दावा किया गया। इसके बावजूद जिले की जमीनी स्थिति अलग तस्वीर पेश कर रही है। एक ओर भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर एमडीए और अन्य विभागों द्वारा चलाए जा रहे सीलिंग अभियान ने व्यापारियों और संस्थान संचालकों में चिंता बढ़ा दी है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग कुमार के अनुसार अब तक करीब ढाई दर्जन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें अस्पताल, पैथोलॉजी लैब, कोचिंग सेंटर, प्रशिक्षण संस्थान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मार्केट कॉम्प्लेक्स और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन भवनों में निर्धारित निर्माण मानकों का पालन नहीं किया गया था। हालांकि शहर में यह भी चर्चा है कि यदि निर्माण मानकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो जनपद के अधिकांश व्यावसायिक और आवासीय भवनों में कहीं न कहीं अनियमितताएं मिल सकती हैं। नई मंडी जैसे विकसित क्षेत्रों से लेकर शहर की अन्य कॉलोनियों तक अवैध निर्माण के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।

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शुक्रवार को शिव चौक से बिजली व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से फोन पर बातचीत करते मंत्री कपिल देव का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इससे पहले सीलिंग अभियान को लेकर एमडीए अधिकारियों के साथ उनकी बैठक की तस्वीरें भी सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद यह संदेश जरूर गया कि मंत्री अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन आम लोगों के बीच यह धारणा भी मजबूत हुई कि उनके निर्देशों का अपेक्षित असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार के प्रभावशाली मंत्री को भी स्थानीय स्तर पर बार-बार अधिकारियों से गुहार लगानी पड़े तो यह प्रशासनिक समन्वय पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वहीं आम जनता की सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिजली संकट, अधूरे विकास कार्य और प्रशासनिक कार्रवाइयों जैसी समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा? इन परिस्थितियों में मुजफ्फरनगर की जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि जब सरकार में वरिष्ठ मंत्री होते हुए भी कपिल देव अग्रवाल जैसे जनप्रतिनिधि ही अधिकारियों के सामने बेबस नजर आ रहे हैं, तो आम नागरिक की शिकायतों का समाधान किसके भरोसे होगा?

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