रोहन राठी हत्याकांडः आईपीएस संजय को भारी पड़ी लापरवाही

जाट समाज में बढ़ते आक्रोश के बीच शासन ने पुलिस की कप्तानी छीनकर एसएसपी संजय वर्मा को प्रयागराज में बनाया पीएसी दल में सेनानायक

मुजफ्फरनगर। आज की ताजा खबर है, एसएसपी संजय कुमार वर्मा का करीब डेढ़ साल की तैनाती के बाद तबादला, जी हां तबादला, ये कोई चौंकने वाली बात नहीं है, सर्विस में तबादला एक रूटीन माना जाता है, लेकिन कुछ घटनाक्रम कुछ तबादलों को लेकर समाज में एक नई चर्चा को जन्म देते हैं। ऐसी ही एक चर्चा बुधवार को यूपी के 20 आईपीएस अफसरों की तबादला सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तेजी से होती नजर आई, क्योंकि इन 20 आईपीएस अफसरों में जिले के पुलिस कप्तान संजय वर्मा का नाम भी शामिल है। चर्चा तबादले पर नहीं, बल्कि उसके अंदाज पर हो रही है, शासन ने संजय वर्मा को जिले की कप्तानी से हटाकर पीएसी दल के सेनानायक के पद पर प्रयागराज भेज दिया, इसे लोग एक सजा और डिमोशन मान रहे हैं। इसके पीछे रोहन त्यागी हत्याकांड बड़ी वजह बताया जा रहा है।

साल 2014 के प्रमोटेड आईपीएस संजय वर्मा ने मई 2025 में मुजफ्फरनगर के एसएसपी के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने जिले में कई बड़े गुडवर्क करते हुए कानून एवं व्यवस्था के साथ ही शांति बनाये रखने में बड़ी उपलब्धियां हासिल की। इसी बीच पुरकाजी थाना क्षेत्र के गांव हरेटी के ग्राम प्रधान और भारतीय किसान यूनियन में जिला सचिव के पद पर कार्यरत विवेक राठी के इकलौते पुत्र 18 वर्षीय एलएलबी के छात्र रोहन राठी का रहस्यमयी कत्ल हो जाता है। इसी कत्ल की उलझी कहानी एसएसपी संजय वर्मा को भारी पड़ गई।

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घटनाक्रम की बात करें तो 23 जुलाई की शाम छात्र रोहन राठी अपने परिजनों से यह कहकर घर से निकलता है कि वो भोपा क्षेत्र के गांव ननहेडा में अपने दोस्त के यहां जन्मदिन की पार्टी में जा रहा है। देर रात हो जाने के बाद भी घर नहीं लौटने पर पिता विवेक राठी ने 11 बजे रोहन को फोन किया तो उसने बताया कि वो सवेरे ही घर आयेगा। यहीं पर रूक गया है, लेकिन 24 सितम्बर की अलसुबह रोहन का शव हरेटी-सलेमपुर मार्ग पर खेत में पड़ा मिलता है। उसके शरीर पर पिटाई के निशान भी थे। 25 सितम्बर को पुरकाजी पुलिस और एसओजी की दो युवकों से मुठभेड़ हो जाती है, इसमें दोनों घायल होते हैं। इनकी पहचान उत्तराखंड के लक्सर क्षेत्र के गांव संगीपुर निवासी इमाम नाजिम और देवबंद थाना क्षेत्र के गांव जहीरपुर निवासी शाहवेज के रूप में होती है। इनसे रोहन की आर-15 बाइक, मोबाइन फोन और अन्य सामान बरामद होने पर पुलिस इनको ही रोहन का हत्यारोपी बताकर घटना खोल देती है।

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यहीं से सारा बखेड़ा शुरू होता है। पुलिस की कहानी के अनुसार नाजिम कार से अपनी ससुराल जहीरपुर जा रहा था, रास्ते में रोहन की बाइक में टक्कर लग गई। रोहन घायल हुआ, बाद में नाजिम अपने साले शाहवेज के साथ वापस लौटता है और गंभीर घायल रोहन का गला दबाकर दोनों हत्या कर देते हैं और उसकी बाइक व सामान लेकर फरार हो जाते हैं। पुलिस ने बाइक मंगलौर से बरामद की। मंगलौर की इस मस्जिद में नाजिम इमाम बताया गया था। परिजनों के साथ ही ग्रामीणों को पुलिस की यह कहानी आज तक भी हजम नहीं हो रही है। विवेक राठी ने इसे अधूरा खुलासा बताते हुए सही खुलासे की मांग की आवाज बुलंद की तो भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत, मंत्री अनिल कुमार और मंत्री कपिल देव, सपा सांसद हरेन्द्र मलिक, जाट महासभा के अध्यक्ष ब्रजवीर सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष संजय राठी ने उनका समर्थन किया और पुलिस से सही खुलासे की मांग की। 27 सितम्बर को मंत्री अनिल कुमार ने एसएसपी संजय वर्मा की परिजनों और ग्रामीणों के बीच मेरठ रोड स्थित डाक बंगले पर परेड करा दी। इस मीटिंग के बाद देर रात एसएसपी ने रोहन हत्याकांड की नये सिरे से जांच के लिए एसपी सिटी अमृत जैन के नेतृत्व में छह सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी। तीन दिन का समय पुलिस ने लिया था, लेकिन दस दिन बीत जाने के बाद भी सवाल वहीं खड़े हैं और आक्रोश कायम है।

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यह बात शासन तक भी पहुंची और केन्द्रीय मंत्री रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी इसमें गंभीरता दिखाई। इसी बीच अब एसएसपी संजय वर्मा का तबादला कर दिया गया। उनको कोई जिला नहीं दिया गया, बल्कि पुलिस सर्विस में साइड पोस्टिंग माने जाने वाली पीएसी कमांड सौंपी गई। इसे एक सजा के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें संजय वर्मा पर लापरवाही बरतने और सत्ता एवं विपक्ष के एकजुट होने के बावजूद भी गंभीरता नहीं दिखाने के आरोप लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल एसआईटी में शामिल टीम को लेकर ही परिजनों और ग्रामीणों ने किया। 25 सितम्बर की मुठभेड़ में जो पुलिस अफसर शामिल रहे, उन्हीं को एसआईटी में शामिल कर लिया गया। एसपी सिटी अमृत जैन की अध्यक्षता में गठित एसआईटी में सीओ सदर सुनील कुमार, प्रभारी निरीक्षक सर्विलांस सेल रवेन्द्र सिंह, प्रभारी एसओजी मोहित सिंह, थानाध्यक्ष छपार मोहित कुमार और थानाध्यक्ष पुरकाजी मानवेन्द्र भाटी को शामिल किया गया। ये ही लोग नाजिम और शाहवेज वाली मुठभेड़ में थे, सवाल उठा कि ये अफसर अपनी ही मुठभेड़ और कहानी को झूठा क्योंकर ठहरायेंगे? ऐसे ही चंद और सवाल कायम हैं और ये सवाल एसएसपी संजय वर्मा पर गाज बनकर गिरे हैं।

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