जिला जज वीरेन्द्र सिंह के रिटायर्ड होने के बाद एडीजे गरिमा सिंह संभाल रही थी अतिरिक्त दायित्व, प्रतापगढ़ से आये राजीव कमल
मुजफ्फरनगर। इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रशासनिक दल के द्वारा न्यायिक अधिकारी राजीव कमल पांडेय को मुजफ्फरनगर अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह प्रतापगढ़ कोर्ट में तैनात थे। मुजफ्फरनगर में लंबे समय से जिला जज का पद खाली चल रहा था।
उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरनगर जनपद में तैनात जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र कुमार सिंह अगस्त माह में न्यायिक विभाग की सेवा से रिटायर्ड हो गये थे, उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत यहां पर नये जिला एवं सत्र न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं की गई थी। वीरेन्द्र कुमार सिंह के रिटायर्ड होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से यहां पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गरिमा सिंह को कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यभार सौंपा गया था। गरिमा सिंह अपै्रल 2026 में ही तबादले पर शाहजहांपुर से मुजफ्फरनगर में तैनात की गई थीं। करीब डेढ़ माह के खाली पद के बाद अब मुजफ्फरनगर में न्यायिक व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाये रखने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर न्यायिक अधिकारी राजीव कमल पांडेय की नियुक्ति की गई है।
जिला जज का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहीं थी एडीजे गरिमा
राजीव कमल पांडेय ने 2013 में न्यायिक अधिकारी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उनको पहली तैनाती एडिशनल जिला और सेशन जज के रूप में कुशीनगर अदालत में मिली। इसके बाद राजीव कमल पांडेय कुशीनगर कोर्ट में ही एडीजे (एफटीसी) बने। इसके बाद वह बनारस में एडिशनल जिला और सेशन जज बनाए गए। वाराणसी कोर्ट में वह लंबे समय तक तैनात रहे। वहां उनका प्रमोशन होता रहा। इसके बाद 2020 में फैमिली कोर्ट चंदौली में प्रिंसिपल जज बनाए गए। इसी पद पर 2023 में वह रामपुर कोर्ट में तैनात रहे।
एक साल पहले प्रतापगढ़ में पहली बार बने जिला जज
जज राजीव कमल पांडेय रामपुर कोर्ट में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के पीठीसीन अधिकारी भी बने। 10 अक्टूबर, 2025 से उन्होंने प्रतापगढ़ अदालत में जिला और सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यभार संभाला। अब उनको प्रतापगढ़ से मुजफ्फनगर कोर्ट में जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है। जज राजीव कमल पांडेय का जन्म 1 फरवरी 1974 को हुआ। वह मूलरूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम शिव कैलाश पांडेय है। उन्होंने बीएससी, एलएलबी और एलएलएम तक की शिक्षा ग्रहण की है। वर्ष 2034 में उनका रिटायरमेंट है।
रिटायरमेंट से चंद दिनों पहले एक फैसले से चर्चित रहे जिला जज वीरेन्द्र
जिला जज रहते हुए वीरेन्द्र कुमार सिंह ने रिटायर्ड होने से कुछ दिन पूर्व ही एक फैसला लिया, जिसको लेकर वो खासी चर्चाओं में रहे। इस फैसले में जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत से करीब 97 से 100 गंभीर आपराधिक मामलों (जिनमें मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान हो सकता है) को अपने प्रशासनिक आदेश के तहत वापस लेकर अन्य अदालतों में स्थानांतरित कर दिया था। जज रवि कुमार दिवाकर ने कुछ ही महीनों में हत्या जैसे संगीन कई मामलों में दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक कदम विपरीत चर्चा का कारण बना और खुद जज रवि ने अपने अगले फैसलों में इसको लेकर सख्त टिप्पणी की थी।
