अरावली में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बनेगी हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी

अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण को ऐसा नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने खनन से जुड़े तमाम पहलुओं की गहन जांच के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि अरावली जैसे संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से अहम क्षेत्र में अवैध खनन केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और एमिकस क्यूरी को निर्देश दिए हैं कि वे चार सप्ताह के भीतर पर्यावरण, खनन और भू-विज्ञान से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों के नाम सुझाएं, ताकि विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। यह समिति सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम करेगी।

इसे भी पढ़ें:  नीट यूजी 2026 परीक्षा शुल्क रिफंड के लिए 13 लाख उम्मीदवारों ने जमा किए बैंक विवरण

अदालत को यह भी बताया गया कि अरावली के अलग-अलग हिस्सों में अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस पर राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने भरोसा दिलाया कि राज्य में किसी भी तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और उनकी श्रेणियों की एक समान परिभाषा को लेकर पहले दिए गए आदेश को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला बरकरार रखा है। अदालत का मानना है कि प्रस्तावित परिभाषा में कुछ अहम अस्पष्टताएं हैं, जिनका समाधान जरूरी है।

इसे भी पढ़ें:  ईरान सऊदी एयर बेस हमला: 10 सैनिक घायल, विमान तबाह

गौरतलब है कि इससे पहले अदालत ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली अरावली पर्वतमाला में नई खनन लीज जारी करने पर रोक लगा दी थी। यह रोक विशेषज्ञ रिपोर्ट आने तक लागू की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित होने वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अरावली क्षेत्र में खनन और संरक्षण से जुड़े आगे के फैसले तय किए जाएंगे।

इसे भी पढ़ें:  केशव मौर्य को ब्रिटेन वीजा नहीं मिला, बीच में ही लौटे लखनऊ
Share This Article