18 साल पुराने सड़क हादसे में मुआवजा हड़पने का आरोप, फर्जी पत्नी और बच्चों के नाम पर लिया गया 3.65 लाख का क्लेम
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में करीब 18 वर्ष पुराने सड़क हादसे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति की मौत के बाद मुआवजा पाने के लिए गंभीर स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया। मृतक की कथित पत्नी और दो बच्चों को उसके आश्रित बताकर अदालत में याचिका दाखिल की गई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त कर लिया गया। मामले में अब शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
ग्राम कासमपुर खोला निवासी शीशांक शर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर थाना मीरापुर में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांव के ही राजपाल पुत्र स्वर्गीय जगवीर सिंह और उसकी पत्नी शोभा ने धोखाधड़ी कर न्यायालय को गुमराह करते हुए मुआवजे की रकम हासिल कर ली। प्रार्थना पत्र के अनुसार राजपाल का भाई यशपाल सिंह अविवाहित था। 8 दिसंबर 2008 को देवल गांव के पास एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उपचार के दौरान 19 दिसंबर 2008 को उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना को लेकर राजपाल सिंह ने थाना रामराज में बस संख्या यूपी-12एन-4639 के अज्ञात चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 279, 337 और 338 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि इसके बाद राजपाल और उसकी पत्नी शोभा ने मेरठ शहर के कालीया गढ़ी क्षेत्र का फर्जी पता दर्शाते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) में वर्ष 2009 में याचिका दायर कर दी। याचिका में शोभा को मृतक यशपाल की पत्नी और अपने दोनों पुत्रकृप्रिंस उर्फ शेखर तथा सोनूकृको मृतक के बेटे के रूप में दर्शाया गया। आरोप है कि इस आधार पर अदालत से मुआवजा दिलाने की मांग की गई।
मेरठ की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) कोर्ट संख्या-11 ने 18 जुलाई 2011 को आदेश पारित करते हुए क्लेम के रूप में 3 लाख 65 हजार रुपये देने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरी राशि शोभा ने मृतक की पत्नी बनकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त कर ली।
शिकायत में कहा गया है कि ग्राम कासमपुर खोला की पंचायत निर्वाचन नामावली 2015 में शोभा का नाम राजपाल की पत्नी के रूप में दर्ज है। इसके अलावा परिवार रजिस्टर में भी वही विवरण अंकित है। इसी प्रकार गांव के कंपोजिट विद्यालय के अभिलेखों में भी दोनों बच्चोंकृनिखिल और शेखरकृके पिता के रूप में राजपाल सिंह तथा माता के रूप में शोभा का नाम दर्ज है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों बच्चे राजपाल और शोभा की संतान हैं, न कि मृतक यशपाल के आश्रित हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत में गलत जानकारी देकर मुआवजे की राशि प्राप्त की गई, जो न्यायालय के साथ धोखाधड़ी का मामला है। मीरापुर एसएचओ ने बताया कि पुलिस ने एसएसपी के निर्देश पर मामला दर्ज कर लिया है और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






