देवबंद/सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को सहारनपुर जिले के देवबंद पहुंचे। देवबंद के जड़ौदा जट्ट क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने जिले से जुड़ी विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में करीब ढाई हजार करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं और लगभग 350 विकास योजनाओं का जिक्र सामने आया है।
कार्यक्रम में अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। जनसभा में मुख्यमंत्री ने विकास, कनेक्टिविटी, कानून व्यवस्था और सरकार की योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी। इस दौरान भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
देवबंद की धरती से विकास का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत सहारनपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को याद करते हुए की। उन्होंने मां शाकुंभरी सिद्धपीठ और माता त्रिपुरबाला कुंदरी के प्रति श्रद्धा जताई। इसके बाद उन्होंने सहारनपुर और देवबंद के लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचे। उनके अनुसार सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में लगातार काम हो रहा है, ताकि जिले के गांवों और कस्बों तक सुविधाओं की पहुंच मजबूत हो सके।
लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, योजनाओं का भरोसा
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़ी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों को केंद्र में रखकर काम कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि पहले योजनाओं का लाभ पाने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों तक सुविधा सीधे पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह कार्यक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सहारनपुर मंडल में बुनियादी ढांचे को लेकर लंबे समय से कई मांगें उठती रही हैं। सड़क, पेयजल, आवास, शहरी सुविधाओं और ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर लोगों की उम्मीदें भी इस कार्यक्रम से जुड़ी रहीं।
कनेक्टिविटी और कानून व्यवस्था पर जोर
जनसभा में मुख्यमंत्री ने कनेक्टिविटी को विकास की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि जब सड़कें बेहतर होती हैं, परिवहन आसान होता है और कानून व्यवस्था मजबूत रहती है, तभी निवेश और रोजगार का माहौल बनता है।
उन्होंने प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर भी अपनी सरकार का पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का माहौल मजबूत हुआ है और इसका सीधा असर विकास कार्यों पर दिखाई देता है।
देवबंद जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक कस्बे में मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने दंगों, फतवों और पहचान की राजनीति जैसे मुद्दों पर भी बात रखी। एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने बंगाल और असम के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए जाति और विभाजन की राजनीति पर निशाना साधा।
सहारनपुर की नई पहचान पर बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारनपुर अब केवल अपनी पुरानी चुनौतियों से नहीं, बल्कि नई संभावनाओं से पहचाना जा रहा है। उन्होंने लकड़ी उद्योग, कृषि, धार्मिक पर्यटन, शिक्षा और व्यापार की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी और योजनाओं से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
सहारनपुर लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख जिला रहा है। यहां से उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली की दूरी भी अधिक नहीं है। ऐसे में सड़क और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं स्थानीय व्यापार, उद्योग और आम लोगों की आवाजाही पर सीधा असर डाल सकती हैं।
जनसभा में दिखी सियासी गर्मी
मुख्यमंत्री का देवबंद दौरा केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। जनसभा में उनके संबोधन में विकास के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी साफ दिखाई दिया। उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अब दंगे नहीं, विकास की चर्चा हो रही है।
कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर रहे। मंच से स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार की योजनाओं को जनता के सामने रखा।
आम लोगों की नजर अब काम की रफ्तार पर
देवबंद में हुए इस कार्यक्रम के बाद अब लोगों की नजर इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने की गति पर रहेगी। लोकार्पण वाली योजनाओं से जहां तत्काल सुविधा मिलने की उम्मीद है, वहीं शिलान्यास वाली परियोजनाओं को तय समय में पूरा कराना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
सहारनपुर और देवबंद के लोगों के लिए यह दौरा विकास की उम्मीदों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने मंच से योजनाओं और कानून व्यवस्था पर बड़ा दावा किया है। अब सवाल यही है कि इन घोषणाओं और परियोजनाओं का लाभ गांव, कस्बे और शहर के आम आदमी तक कितनी तेजी से पहुंचता है।






