मुजफ्फरनगर-जिला चिकित्सालय में डॉक्टर सरकारी, लेकिन फीस प्राइवेट

समाजसेवी मनीष चौधरी के साथ भी की गई अभद्रता, सीएमएस से की शिकायत, सीएमओ ने नहीं उठाया फोन

मुजफ्फरनगर। गरीबों और आर्थिक रूप से तंग जीवन गुजारने वाले लोगों के लिए बीमारी और आकस्मिक हादसों में इलाज का एकमात्र सहारा सरकारी अस्पताल रहते हैं, सरकार का दावा है कि लोगों के उपचार के लिए हर जरूरतमंद के लिए इन सरकारी अस्पतालों में हर सुविधा का प्रबंध किया गया है। कुछ मेडिकल सुविधाएं निःशुल्क हैं तो कुछ के लिए निम्न शुल्क तय है, लेकिन यहां पर आम आदमियों से होती लूट किसी से छिपी नहीं है। ऐसा ही एक मामला जिला चिकित्सालय में सामने आया है। यह अस्पताल सरकारी है, लेकिन यहां पर सरकारी नौकरी पाकर मोटा वेतन सरकार से लेने वाले डॉक्टरों ने भी अपनी निजी फीस तय कर रखी है, जो उनके इशारे पर उनके खास बन्दे वसूलने का काम करते हैं। ऐसे ही एक खास बन्दे ने दिवंगत पत्रकार की माता के ऑपरेशन के लिए डॉक्टर के लिए निजी फीस और 20 हजार रुपये की अलग डिमांड की।
भोपा क्षेत्र के गांव गादला निवासी नीरज त्यागी कई समाचार पत्रों में फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते रहे। पिछले दिनों बीमारी के कारण नीरज त्यागी का निधन हो गया। उनकी बुजुर्ग माता, पत्नी और बच्चे गांव में ही गुजर बसर कर रहे हैं। पिछले दिनों नीरज त्यागी की 65 वर्षीय माता सालित्री देवी पत्नी सेवाराम घर पर ही अचानक गिर गई। परिजनों ने उनको चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई है। प्राइवेट में उपचार कराया तो ऑपरेशन का परामर्श दिया गया। परिजनों ने समाजसेवी मनीष चौधरी से सम्पर्क किया। उन्होंने सालित्री देवी को 4 सितम्बर को जिला चिकित्सालय में लाकर चिकित्सक को दिखाया। अस्थि रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. चतुर्वेदी ने उनका परीक्षण किया और ऑपरेशन की सलाह देते हुए भर्ती कर लिया तथा जांच कराई। मनीष चौधरी के अनुसार इसी बीच डॉ. चतुर्वेदी ने परिजनों को कहा कि उपचार सम्बंधी परामर्श के लिए अस्थि रोग विभाग के कर्मचारी लोकेश कुमार से सम्पर्क कर लें। वो सारी चीजों को समझा देगा।

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मनीष चौधरी का आरोप है कि लोकेश कुमार से जब परिजन मिले तो उसने बताया कि ऑपरेशन के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त डॉक्टर साहब को प्राइवेट फीस देनी होगी और 20 हजार रुपये अलग खर्च के लिए जमा कराने होंगे। परिजनों ने यह बात मनीष चौधरी को बताई। आरोप है कि पैसा देने में असर्थता दिखाई तो चिकित्सक ने सालित्री देवी की रैफर स्लिप बना दी और लोकेश ने कह दिया कि अपना मरीज मेरठ ले जाओ। इसी बीच भर्ती सालित्री की तबियत कुछ ज्यादा बिगड़ी और उनको ऑक्सीजन लगानी पड़ी। मनीष ने बताया कि वार्ड में शिफ्ट करने और जांच कराने के लिए ले जाने को स्ट्रैचर भी नहीं दिया गया। जब उन्होंने वार्ड में कार्यरत नर्स और अन्य कर्मचारी से स्ट्रैचर मांगा तो पहले आधार कार्ड जमा कराने के लिए कहा गया, वो नहीं मिला तो मोबाइल फोन बंधक रखने के बाद स्ट्रैचर दिया, विरोध किया तो कर्मचारियों ने अभद्रता की। मनीष ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों ने अपने खास बंदों को लूट करने के लिए पूरी छूट दे रखी है। बिना सुविधा शुल्क के कोई काम नहीं होता है।

सीएमएस को मनीष चौधरी से हुए अभद्रता की जानकारी मिली तो सीएमएस डॉ. संजय कुमार वर्मा ने ऑपरेशन थियेटर पर जाकर ही उनसे मुलाकात की और जांच कराने का आश्वासन दिया और कर्मचारियों के गलत व्यवहार के लिए खेद भी जताया। इसके लिए मनीष चौधरी ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि सीएमएस ने रैफर कैंसिल कर वहीं पर उपचार शुरू कराया है। वहीं आरोप है कि वो सीएमओ को कई बार फोन करते रहे, लेकिन फोन नहीं उठा और उठा भी तो दूसरे व्यक्ति ने बात कर फोन काट दिया। सीएमएस डॉ. संजय से जानकारी की गई तो बताया कि मनीष चौधरी ने अभद्रता के सम्बंध में जानकारी मिली थी, हमने कर्मचारियों को मौके पर बुलाकर चेतावनी दी। लेकिन पैसे मांगने के बारे में उनके संज्ञान में कोई बात नहीं आई है, यदि ऐसा है तो वो जांच करायेंगे।

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