नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के बाद भारत ने भी एहतियाती मोर्चे पर सख्ती शुरू कर दी है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय यानी DGHS की ओर से यात्रियों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई है। खास तौर पर उन यात्रियों को सतर्क रहने को कहा गया है, जो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से भारत आ रहे हैं या इन देशों के रास्ते यात्रा कर रहे हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी ऐसे यात्रियों के लिए स्वास्थ्य निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
WHO ने क्या कहा?
WHO ने 17 मई 2026 को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में Bundibugyo virus से जुड़े इबोला प्रकोप को Public Health Emergency of International Concern यानी PHEIC घोषित किया है। WHO ने साफ किया है कि यह अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति है, लेकिन इसे अभी pandemic emergency नहीं माना गया है।
WHO के अनुसार, 16 मई 2026 तक कांगो के Ituri प्रांत में 8 लैब-कन्फर्म केस, 246 संदिग्ध केस और 80 संदिग्ध मौतें रिपोर्ट की गई थीं। इसके अलावा युगांडा की राजधानी कंपाला में कांगो से यात्रा कर आए दो लोगों में लैब-कन्फर्म केस मिले, जिनमें एक मौत भी शामिल है।
एयरपोर्ट पर यात्रियों को क्या करना होगा?
DGHS की एडवाइजरी के मुताबिक, प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को अपनी सेहत पर खास नजर रखनी होगी। अगर किसी यात्री में बुखार, उल्टी, दस्त, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश या शरीर से असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर या हेल्थ डेस्क पर रिपोर्ट करना होगा।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि कोई यात्री संदिग्ध या पुष्ट इबोला मरीज के खून, शरीर के तरल पदार्थ या सीधे संपर्क में आया है, तो उसे बिना देरी स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
21 दिन तक क्यों जरूरी है निगरानी?
इबोला वायरस में संक्रमण के बाद लक्षण आने की अवधि आम तौर पर 2 से 21 दिन मानी जाती है। WHO के अनुसार, इबोला के शुरुआती लक्षण अचानक बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में दर्द के रूप में दिख सकते हैं। इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, दाने और गंभीर मामलों में किडनी-लिवर प्रभावित होने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
इसी वजह से एडवाइजरी में कहा गया है कि भारत पहुंचने के बाद 21 दिनों के भीतर अगर ऐसे लक्षण दिखें तो यात्री तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी पूरी ट्रैवल हिस्ट्री स्वास्थ्य अधिकारियों को बताएं।
भारत में अभी घबराहट नहीं, सावधानी जरूरी
भारत में इस समय आम लोगों के लिए घबराने की स्थिति नहीं बताई गई है। यह कदम एहतियाती निगरानी के तौर पर उठाया गया है, ताकि प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों में किसी संभावित केस की समय रहते पहचान हो सके। इबोला सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह हवा से तेजी से फैलने वाली बीमारी नहीं है। इसका खतरा मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित सामग्री के सीधे संपर्क से जुड़ा होता है। CDC के अनुसार, आम यात्रियों और सामान्य जनता के लिए जोखिम कम रहता है, जबकि बिना सुरक्षा संक्रमित मरीज की देखभाल करने वाले लोगों में खतरा अधिक होता है।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां
प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण हल्के में नहीं लेने चाहिए। एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य डेस्क को सही जानकारी दें, डॉक्टर से अपनी यात्रा का पूरा विवरण साझा करें और किसी भी संदिग्ध संपर्क को छिपाएं नहीं। स्वास्थ्य एजेंसियों का जोर इसी बात पर है कि समय पर सूचना और स्क्रीनिंग से संक्रमण की चेन को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता है।






