नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम लागू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स काटे जाएंगे और तय सीमा से नीचे जाने पर लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बड़े बदलाव का ऐलान किया है। अब केवल जुर्माना भरकर बच निकलना आसान नहीं होगा। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
क्या है ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम?
देश में अभी तक ट्रैफिक नियम तोड़ने पर आमतौर पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है। लेकिन ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम में ड्राइविंग लाइसेंस को एक तरह के “रिपोर्ट कार्ड” की तरह माना जाएगा। जब भी कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ेगा, उसके लाइसेंस से निश्चित संख्या में पॉइंट्स काट लिए जाएंगे। यदि ये पॉइंट्स तय न्यूनतम सीमा से नीचे चले जाते हैं, तो लाइसेंस को 6 महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।
बार-बार गलती पर लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द
सरकार का यह नया कदम सड़क हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। यदि कोई चालक लगातार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो ऐसे मामलों में उसका ड्राइविंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द भी किया जा सकता है। इससे आदतन नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बढ़ेगी।
किन गलतियों पर कटेंगे पॉइंट्स?
इस नई व्यवस्था का दायरा व्यापक होगा। निम्नलिखित उल्लंघनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
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ओवरस्पीडिंग
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वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग
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रॉन्ग साइड ड्राइविंग
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शराब पीकर वाहन चलाना
इन गंभीर लापरवाहियों को सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह माना जाता है।
सड़क सुरक्षा पर बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेड-आधारित ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम लागू होने से लोगों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। केवल जुर्माना भरने की बजाय अब लाइसेंस खोने का खतरा रहेगा, जिससे नियमों के पालन की संभावना मजबूत होगी। सरकार का उद्देश्य साफ है—सड़क हादसों में कमी और अनुशासित यातायात व्यवस्था। अब वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।






