ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध हथियार ने बदली जंग की तस्वीर

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध हथियार इस समय दुनिया की सबसे बड़ी चर्चा बन गए हैं, जहां लेजर तकनीक से ₹300 में ड्रोन गिराने जैसे दावे सामने आ रहे हैं। इस जंग में सिर्फ विनाश नहीं, बल्कि हथियारों की ताकत और नई तकनीक का प्रदर्शन भी हो रहा है। इजरायल और अमेरिका को उम्मीद थी कि कुछ घंटों में ईरान झुक जाएगा, लेकिन ईरान के हथियारों और रणनीति ने युद्ध की दिशा बदल दी। ईरान के खिलाफ इस्तेमाल हो रही गार्क (ग्लोबल ऑटोनॉमस रिकॉनसेंस क्राफ्ट) बोट बेहद खतरनाक मानी जा रही है।

बिना पायलट के चलने में सक्षम, 5000 घंटे लगातार ऑपरेशन, रियल टाइम डेटा ट्रांसमिशन, पनडुब्बियों और माइन्स की पहचान, यह बोट समुद्र से जमीन पर हमला करने और ड्रोन लॉन्च करने में सक्षम है। ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी युद्धपोतों को पीछे हटने पर मजबूर किया। वहीं अमेरिका का कहना है कि 101 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। यह मुकाबला दिखाता है कि अब युद्ध में सेकेंड्स के भीतर फैसले होते हैं और एक चूक भारी पड़ सकती है।

इसे भी पढ़ें:  ट्रंप चीन दौरा पर सस्पेंस खत्म, अमेरिका-चीन रिश्तों की परीक्षा

अमेरिका ने B-2 बॉम्बर का इस्तेमाल कर ईरान के भूमिगत ठिकानों पर हमला किया। रडार में नहीं आता, 2 लाख पाउंड तक बम ले जाने की क्षमता, पहाड़ों के अंदर बने ठिकानों को निशाना, नतांज, फोर्ड और इस्फहान जैसे ठिकानों पर इसी से हमले किए गए। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध हथियारों में सबसे बड़ा बदलाव ड्रोन तकनीक ने किया है। FPV ड्रोन: टारगेट को लाइव देखकर हमला, शाहेद ड्रोन: ईरान का सबसे खतरनाक ड्रोन, परवेज ड्रोन: सुसाइड मिशन के लिए तैयार हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसने मर्कावा टैंक पर FPV ड्रोन से हमला किया। युद्ध में सबसे चौंकाने वाली तकनीक लेजर आधारित ड्रोन डिफेंस सिस्टम है। हाई पावर लेजर बीम, 8 किमी तक पहचान, ड्रोन को तुरंत निष्क्रिय, एक ड्रोन को गिराने का खर्च सिर्फ ₹300 से ₹1000 बताया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें:  एल मेंचो मारा गया: 125 करोड़ का इनामी ढेर

यह सिस्टम आयरन डोम जैसे महंगे सिस्टम का सस्ता विकल्प बनता दिख रहा है। ईरान ने ऐसी मिसाइलें इस्तेमाल कीं जिनसे हमले से पहले कई वॉरहेड निकलते हैं। एक मिसाइल, कई धमाके, डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती, तेलअवीव समेत कई शहरों में असर इस युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़ा इस्तेमाल हुआ है। बड़े डेटा का विश्लेषण, टारगेट लॉक करने में मदद, मल्टी लेयर डिफेंस सिस्टम AI ने हथियारों की सटीकता और गति को कई गुना बढ़ा दिया है। ईरान ने अपने मिसाइल और परमाणु ठिकानों को पहाड़ों के नीचे छिपा रखा है।

इसे भी पढ़ें:  कोडिन कफ सिरप कांड के दोषी को उल्टा लटका देंगे, अखिलेश बचा नहीं सकते: केशव मौर्य 

मिसाइल स्टोरेज और लॉन्चर, एटॉमिक रिएक्टर, भारी सुरक्षा संरचना इन्हें खत्म करना अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यह युद्ध साफ कर रहा है कि अब जंग सिर्फ जमीन या आसमान की नहीं, बल्कि तकनीक, डेटा और हथियारों की हो गई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध हथियार सिर्फ जीत-हार तय नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया को यह भी दिखा रहे हैं कि भविष्य की लड़ाई कैसी होगी।

Also Read This

मुजफ्फरनगर में भीषण गर्मी के चलते बदला स्कूलों का समय

सभी बोर्ड के लिए आदेश जारी, नर्सरी से कक्षा 8 तक के सभी विद्यालय अब सुबह 7.30 से दोपहर 12.30 बजे तक होंगे संचालित मुजफ्फरनगर। भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिले में नर्सरी से कक्षा आठवीं तक संचालित सभी विद्यालयों के समय में बदलाव किया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि परिषदीय विद्यालय एक जुलाई से विद्यालय खुलने के साथ ही नया समय लागू रहेगा। जबकि अन्य विद्यालय खुल चुके हैं। इसे भी पढ़ें:  कोडिन कफ सिरप कांड के दोषी को उल्टा लटका देंगे, अखिलेश बचा नहीं सकते: केशव मौर्य  उन्होंने बताया कि पूर्व निर्धारित समय प्रातः 8.00 बजे से दोपहर

Read More »

गांव पावटी में प्रस्तावित शराब ठेके का ग्रामीणों ने किया विरोध, डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन

उचित निर्णय नहीं लिया तो ग्रामीण बड़े स्तर पर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे

Read More »