वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मणिकर्णिका घाट विवाद को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि एआई जेनरेटेड वीडियो के जरिए मंदिरों को तोड़े जाने का भ्रम फैलाकर जनभावनाओं को भड़काने की साजिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के समय भी इसी तरह का प्रयास किया गया था। उस दौरान एक वर्कशॉप में रखी टूटी मूर्तियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर काशी की विरासत को बदनाम करने की कोशिश हुई थी। अब एक बार फिर वही रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विकास कार्यों में बाधा डालने और देश की सांस्कृतिक विरासत को बदनाम करने की सुपारी लेकर काम कर रहे हैं।
काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में की पूजा
इससे पहले वाराणसी पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर में अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने काल भैरव मंदिर में भी दर्शन किए और मणिकर्णिका घाट का स्थलीय निरीक्षण किया।
श्रद्धालुओं की संख्या और आर्थिक योगदान का जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि 2014 से पहले या काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण से पहले रोजाना श्रद्धालुओं की संख्या औसतन 5 हजार से 25 हजार के बीच रहती थी। आज वही संख्या बढ़कर 1.25 लाख से 1.50 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि अकेले काशी ने देश की जीडीपी में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में हुए समग्र विकास को बाधित करने के लिए लगातार साजिशें रची जा रही हैं। काशी अविनाशी है और हर सनातन धर्मावलंबी व भारतवासी के लिए आस्था का केंद्र है, लेकिन स्वतंत्र भारत में जिस तरह का विकास काशी को मिलना चाहिए था, वह पहले नहीं हो पाया।
55 हजार करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत
सीएम योगी ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में काशी ने अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए भौतिक विकास में भी नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। काशी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें से 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण हो चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी सहित हर क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ है।
मणिकर्णिका घाट परियोजना पर सरकार का पक्ष
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बनारस के दो प्रमुख प्राचीन घाट—मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट—ऐसे स्थल हैं, जहां लोग अपने परिजनों को सम्मानजनक विदाई देना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से मणिकर्णिका घाट परियोजना के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्य सरकारी धन से नहीं बल्कि सीएसआर फंड से कराया जा रहा है, इसके बावजूद कांग्रेस के लोग इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि धार्मिक संस्कार गरिमा और निरंतरता के साथ संपन्न हों।
पर्यावरण और डोम समाज का रखा गया ध्यान
सीएम योगी ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान या उसके बाद राख गंगा में न जाए, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है, क्योंकि इससे गंगा के बीओडी और सीओडी स्तर पर असर पड़ता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि डोम समाज, जो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा करता है, उसके सम्मान में कोई कमी न आए।
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में गंगा के जलस्तर को ध्यान में रखते हुए शवदाह प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रतीक्षालय, लकड़ी भंडारण, शौचालय, रैम्प, ड्रेनेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।






