लखनऊ गैस संकट: न नया कनेक्शन, न रिफिलिंग, काम ठप

लखनऊ गैस संकट ने राजधानी के होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और रेहड़ी-पटरी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति सामान्य दिनों के मुकाबले महज 45 प्रतिशत रह जाने, नए कनेक्शन रुकने और रिफिलिंग प्रभावित होने से कारोबारियों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राजधानी में 1000 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल और 5000 से ज्यादा रेस्टोरेंट व मिठाई की दुकानें हैं, जहां व्यावसायिक सिलिंडर का इस्तेमाल होता है।

लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल 3500 व्यावसायिक कनेक्शन ही वैध हैं। ऐसे में शहर के आधे से ज्यादा रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों के पास वैध व्यावसायिक गैस कनेक्शन नहीं है। गैस संकट के कारण अब उन दुकानदारों के सामने भी परेशानी बढ़ गई है, जो अब तक किसी तरह जुगाड़ से काम चला रहे थे। नया कनेक्शन नहीं हो पाने और रिफिलिंग अटकने से अब भट्ठी, हीटर और दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है। तेल कंपनियों ने अस्पताल, रेलवे और रक्षा जैसे आपातकालीन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है।

इसका असर यह हुआ है कि आम दुकानदारों को अब जुगाड़ से भी गैस नहीं मिल पा रही है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कारोबारी हैं, जो व्यावसायिक गैस का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उनके पास वैध व्यावसायिक कनेक्शन नहीं है। यही वजह है कि आपूर्ति घटते ही सबसे ज्यादा दबाव इन्हीं दुकानदारों पर पड़ा है। करीब 50 हजार रेहड़ी-पटरी दुकानदारों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। रिफिलिंग रुकने से उनका कामकाज ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। राणा प्रताप मार्ग का मामला राणा प्रताप मार्ग पर पूड़ी-सब्जी की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि उसके पास व्यावसायिक कनेक्शन नहीं है। वह घरेलू एलपीजी और भट्ठी से ही दुकान चला रहा है। अमीनाबाद के एक मशहूर ढाबा संचालक ने बताया कि उनके पास व्यावसायिक कनेक्शन नहीं है। किसी तरह काम चल रहा था, लेकिन अब सिलिंडर नहीं मिलने से भट्ठी से काम चलाना पड़ रहा है। निशातगंज में पूड़ी भंडार के नाम से दुकान चलाने वाले एक शख्स ने बताया कि वह व्यावसायिक और घरेलू दोनों सिलिंडरों से काम चलाते हैं।

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जब जो मिल जाए, उसी से काम करना पड़ता है। बाकी समय भट्ठी का सहारा है। डालीबाग स्थित चाय-समोसा की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि उनके पास व्यावसायिक सिलिंडर तो है, लेकिन कनेक्शन नहीं है। एक महीना पहले तक गैस की दिक्कत नहीं थी, इसलिए कनेक्शन नहीं लिया। अब 5000 रुपये में भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में हीटर और इंडक्शन से काम चलाना पड़ रहा है। छोटे दुकानदारों की सुविधा के लिए इंडियन ऑयल ने 5 किलो का छोटू सिलिंडर पेश किया है। इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख संजय भंडारी ने बताया कि दुकानदार 1525 रुपये में नया कनेक्शन ले सकते हैं, जिसमें सिलिंडर की कीमत भी शामिल है। इसके बाद यह सिलिंडर 581 रुपये में रिफिल कराया जा सकेगा। इसके लिए ग्राहक को अपनी नजदीकी गैस एजेंसी पर केवल एड्रेस प्रूफ देना होगा।

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आधिकारिक स्तर पर व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति सामान्य दिनों की तुलना में 45 प्रतिशत बताई जा रही है। वहीं मिठाई कारोबारी और उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी का कहना है that कंपनियां कुछ भी कहें, लेकिन व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति 30 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। उनका कहना है कि सरकार ने घरेलू गैस के लिए कोटा 100 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह 60 प्रतिशत था और शेष 40 प्रतिशत हिस्से में बिना बुकिंग वालों को भी सिलिंडर मिल जाता था।

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अब नई व्यवस्था से छोटे दुकानदारों के सामने और दिक्कतें बढ़ सकती हैं। पूरे हालात का सबसे बड़ा असर छोटे कारोबारियों पर दिखाई दे रहा है। जिन दुकानों का रोज का कारोबार गैस पर टिका है, वहां अब भोजन बनाने से लेकर चाय, नाश्ता और मिठाई तैयार करने तक का काम प्रभावित हो रहा है। लखनऊ गैस संकट ने साफ कर दिया है कि वैध व्यावसायिक कनेक्शन की कमी, सीमित आपूर्ति और रिफिलिंग बाधित होने से राजधानी के छोटे और मध्यम कारोबारियों पर सीधा दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में आपूर्ति नहीं सुधरी तो यह संकट और गहरा सकता है।

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