7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे घिरे रहे; सुप्रीम कोर्ट ने कहा—यह अदालत की अधिकार को चुनौती

पश्चिम बंगाल के मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेर कर रोके जाने के मामले ने गुरुवार को सीधा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया, और अदालत की पहली प्रतिक्रिया ही बेहद कड़ी रही। Chief Justice of India सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यह सिर्फ स्थानीय तनाव नहीं दिखाता, बल्कि अदालत के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया को डराने की कोशिश जैसा दिखाई देता है। घटना 1 अप्रैल की बताई गई है, जब कालीचक-II BDO कार्यालय के बाहर शुरू हुआ विरोध देर रात तक खिंच गया।

सुप्रीम कोर्ट के सामने जो तस्वीर रखी गई, वह साधारण प्रशासनिक गड़बड़ी से कहीं आगे की थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक 7 न्यायिक अधिकारी, जिनमें 3 महिलाएं शामिल थीं, दोपहर बाद से रात तक घिरे रहे। हाईकोर्ट रजिस्ट्री की ओर से राज्य प्रशासन को सूचना देने के बाद भी देर तक “कोई ठोस कार्रवाई” नहीं हुई। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अधिकारियों तक भोजन और पानी तक समय पर नहीं पहुंचा, और जब वे निकाले गए तब उनके वाहनों पर कथित तौर पर पथराव और बांस की लाठियों से हमला हुआ।

यह पूरा विवाद मतदाता सूची से नाम हटने के आरोपों और SIR प्रक्रिया को लेकर गुस्से से जुड़ा है। कालीचक-II ब्लॉक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रही भीड़ उन लोगों के कागजात और नामों पर आपत्ति जता रही थी जिन्हें सूची से बाहर किए जाने का डर था या जिनके नामों पर विवाद चल रहा था। लेकिन अदालत ने साफ संकेत दिया कि किसी भी असहमति का जवाब न्यायिक अधिकारियों को घेर कर नहीं दिया जा सकता — खासकर तब, जब वे उसी प्रक्रिया का हिस्सा हों जिसे अदालत की निगरानी में आगे बढ़ाया जा रहा हो।

इसे भी पढ़ें:  पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ युद्ध का एलान किया, हवाई हमले किए

मालदा न्यायिक अधिकारी बंधक मामला इतना बड़ा क्यों बन गया

इस मामले को समझने के लिए पृष्ठभूमि देखनी होगी। 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के लिए सेवारत और पूर्व जिला जजों की मदद लेने की अनुमति दी थी। अदालत ने तभी कहा था कि जिला प्रशासन और पुलिस को इन न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहयोग देना होगा, और उनके आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। यानी मालदा में घिरे अधिकारी सिर्फ प्रशासनिक टीम का हिस्सा नहीं थे — वे अदालत की तरफ से काम कर रहे थे। यही वजह है कि गुरुवार की सुनवाई में पीठ ने इस घटना को अदालत की अधिकार को चुनौती के रूप में पढ़ा।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें आधी रात तक हालात पर नजर रखनी पड़ी। अदालत ने टिप्पणी की कि यह “सामान्य घटना” नहीं लगती, बल्कि prima facie एक “calculated” और “well-planned” कदम जैसा दिखता है, जिसका असर बाकी न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर भी पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि वह किसी को यह छूट नहीं देगी कि कानून अपने हाथ में लेकर न्यायिक अधिकारियों के मन में मनोवैज्ञानिक डर पैदा करे। आखिर सवाल यही है — अगर अदालत के काम में लगे अधिकारियों की सुरक्षा ही पक्की न हो, तो निष्पक्ष प्रक्रिया कैसे चलेगी?

इसे भी पढ़ें:  थाने में पत्नी की गोली मारकर हत्या

राज्य सरकार की दलील क्या रही

सुनवाई में पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने यह रुख रखा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान व्यवस्था पर चुनाव आयोग का प्रभावी नियंत्रण है, इसलिए राज्य प्रशासन की भूमिका सीमित तरीके से देखी जानी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा। पीठ ने साफ कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना आखिरकार राज्य का ही मूल दायित्व है, और यह कह कर हाथ नहीं झाड़े जा सकते कि प्रशासन पूरी तरह किसी और के नियंत्रण में था। अदालत ने यह भी पूछा कि अगर विरोध अराजनैतिक था, तो वहां राजनीतिक चेहरे क्या कर रहे थे।

इसे भी पढ़ें:  शर्मनाक...सगे भाई कर रहे थे यौन शोषण, मंगेतर को पता चला तो उठाया ऐसा कदम

यहीं से सुनवाई ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया। अदालत ने पश्चिम बंगाल को लेकर तीखी टिप्पणी की और कहा कि वहां हर कोई “political language” बोलता दिख रहा है। यह टिप्पणी अपने आप में असामान्य थी, क्योंकि शीर्ष अदालत आम तौर पर इतना सीधे राजनीतिक ध्रुवीकरण पर नहीं उतरती। इसका अर्थ साफ है: अदालत इस पूरे विवाद को सिर्फ law and order failure नहीं, बल्कि एक ऐसे माहौल के रूप में देख रही है जिसमें संस्थाएं भी दबाव महसूस कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिए

अदालत ने मामले को वहीं छोड़ नहीं दिया। सुनवाई के बाद कई तात्कालिक निर्देश दिए गए:

  • चुनाव आयोग को कहा गया कि जहां-जहां न्यायिक अधिकारी आपत्तियों और दावों की सुनवाई कर रहे हैं, वहां पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात किए जाएं।
  • जांच को CBI या NIA जैसी एजेंसी को सौंपने के लिए Election Commission को कदम उठाने को कहा गया।
  • मुख्य सचिव, DGP, गृह सचिव और संबंधित जिला अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा गया कि उनके खिलाफ अवमानना जैसी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
  • अगली सुनवाई 6 अप्रैल के लिए तय की गई और शीर्ष अधिकारियों को वर्चुअल उपस्थिति का निर्देश दिया गया।

Also Read This

खतौली: बुढ़ाना रोड स्थित मकान में आगजनी, लाखों का सामान जलकर राख

खतौली नगर के बुढ़ाना रोड क्षेत्र में एक मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने का मामला सामने आया है। इस घटना में घर का कीमती सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इकराम पुत्र अकबर निवासी बघरा तितावी का अपनी पत्नी समीना से तीन तलाक कुछ समय पहले हो चुका था। इसके बाद समीना ने सादिक नगर निवासी इरशाद अहमद से दूसरी शादी कर ली थी। शादी के बाद समीना और इरशाद खतौली के बुढ़ाना रोड स्थित एक मकान में साथ रह रहे थे। घटना के दिन समीना बाजार गई हुई थी,

Read More »

डी एस पब्लिक स्कूल के गर्व गोयल ने 90% अंक हासिल किए

मुजफ्फरनगर। डी एस पब्लिक स्कूल के प्रतिभाशाली छात्र गर्व गोयल ने सीबीएसई हाई स्कूल परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय, परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि अनुशासन, समर्पण और निरंतर मेहनत से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। गर्व गोयल वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिज्ञ राजीव गोयल के सुपुत्र हैं। इसे भी पढ़ें:  बस-टैंकर की भीषण टक्कर, उमराह के लिए गए 45 से ज्यादा भारतीयों की मौत की आशंका, पीएम ने जताया दुखगर्व गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उनका कहना है कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग के

Read More »

लखनऊ के विकासनगर में भीषण आग, झुग्गियों में सिलेंडर धमाके

लखनऊ के विकासनगर सेक्टर-14 की झुग्गी बस्ती में बुधवार को भीषण आग लगने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर और फ्रिज कंप्रेसर फटने लगे, जिससे दूर-दूर तक धुआं और ऊंची लपटें दिखाई दीं। इस घटना ने बस्ती में रहने वाले परिवारों को कुछ ही मिनटों में सड़क पर ला खड़ा किया। इसे भी पढ़ें:  शर्मनाक…सगे भाई कर रहे थे यौन शोषण, मंगेतर को पता चला तो उठाया ऐसा कदमइस अग्निकांड में नुकसान कितना हुआ, इस पर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग तस्वीर सामने आई है। सूत्रों की माने तो करीब 200 से अधिक झोपड़ियों के जाली है। दमकल और

Read More »

यशपाल के चार तीरः मुजफ्फरनगर में सीएम दौरे बाद भाजपा में अंदरूनी खींचतान तेज

पूर्व जिलाध्यक्ष यशपाल पंवार की फेसबुक पोस्ट ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी, इशारों में दिए संदेश के मायने तलाशने में जुटे सियासी पंडित मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए मुख्यमंत्री के दौरे की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब एक सोशल मीडिया पोस्ट ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विकास योजनाओं की सौगात और सीएम की जनसभा की गूंज की खुमारी में खोये लोगों के बीच सत्तारूढ़ दल भाजपा के भीतर चल रही संभावित खींचतान को लेकर अब सियासी चटकारों के साथ भविष्य की सियासत पर आधारित अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। मुजफ्फरनगर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया दौरे की

Read More »