मुजफ्फरनगर में करोड़ों की जीएसटी चोरी का भंडाफोड़ः फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से उठा पर्दा

शातिर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, गरीब लोगों के दस्तावेजों पर खड़ी की गई 34 फर्जी फर्में उजागर

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने गरीब और असहाय लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये के जीएसटी राजस्व को चूना लगाया। आधुनिक तकनीक, फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों और दर्जनों शेल कंपनियों के सहारे चल रहे इस फर्जीवाड़े ने न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया, बल्कि कई मासूम लोगों की पहचान को भी जोखिम में डाल दिया था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ और तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा और पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ के निर्देशन में साइबर क्राइम टीम ने मुखबिर की सूचना पर मल्हूपुरा और तिगरी क्षेत्र में दबिश देकर तीन अभियुक्त कृ अफजल, मोनिस अली और मोहम्मद हफीज को गिरफ्तार जीएसटी सिस्टम का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की कर चोरी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गैंग लंबे समय से जिले के ही गरीब, निरक्षर तथा जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज जुटाकर उनके नाम पर दर्जनों कंपनियां खड़ी कर रहा था। इन्हीं कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और कागजी लेन-देन दिखाकर भारी पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही थी।
पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान एसपी क्राइम इंदू सिद्धार्थ ने बताया कि इन तीनों आरोपियों से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह ने अब तक लगभग 40 से 50 फर्जी कंपनियां क्रियाशील की थीं, जिनमें से 34 कंपनियों से संबंधित दस्तावेज पुलिस ने जब्त किए हैं। ये फर्में कागज़ों पर अस्तित्व में थीं, जबकि इनके संचालन के लिए गरीब लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। बदले में इन लोगों को मामूली रकम देकर सहमति ले ली जाती थी। हिरासत में लिए गए मोहम्मद हफीज के पास एलएलबी की डिग्री है और वह अकाउंटिंग तथा जीएसटी की बारीकियों को भली-भांति जानता है। यही वजह थी कि फर्जी कंपनियों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, बिलिंग सिस्टम और ई-वे बिल जनरेशन का पूरा तकनीकी संचालन वह स्वयं करता था। मोनिस अली ऑनलाइन कार्यों में सहयोग करता था, जबकि अफजल कंपनी रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज जुटाने का काम देखता था।
फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों की टैक्स चोरी का खेल
पुलिस के अनुसार गिरोह ने इन कंपनियों के जरिये ऐसे लेनदेन दिखाए, जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं। फर्जी खरीददृफरोख्त की यह प्रक्रिया जीएसटी क्रेडिट क्लेम कर भारी रकम बचाने के लिए की जाती थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों ने कई राज्यों में मौजूद व्यापारियों से भी सांठगांठ की थी। छापेमारी में पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। इनमेंकृ 06 मोबाइल फोन 05 लैपटॉप 01 हार्ड डिस्क 03 रबर स्टाम्प 12 डिजिटल सिग्नेचर यूएसबी इंटरनेट डोंगल, प्रिंटर, की-बोर्ड आधारदृपैन कार्ड 34 फर्जी फर्मों के दस्तावेज तथा एक क्रेटा कार शामिल है। ये बरामदगी गिरोह के बड़े नेटवर्क और व्यापक गतिविधियों की ओर संकेत करती है।
तीनों शातिरों पर दर्ज मिले हैं पहले भी धोखाधड़ी के मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तार तीनों आरोपी वर्ष 2025 में भी खालापार, नई मंडी, शाहपुर और कोतवाली नगर थानों में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा तथा साइबर अपराधों से संबंधित मामलों में नामजद रह चुके हैं। ताज़ा मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बीएनएस व आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया। इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, निरीक्षक इंद्रजीत सिंह, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, धर्मराज यादव, गौरव कुमार, हेड कांस्टेबल आकाश चौधरी, बालकिशन तथा कांस्टेबल मोहित कुमार और राहुल कुमार शामिल रहे। टीम की तत्परता से जिले में जीएसटी फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा नेटवर्क धराशाही हो गया।

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